केंद्र सरकार ने साफ किया है कि OTT प्लेटफॉर्म (Netflix, Amazon Prime, Hotstar आदि) का कंटेंट CBFC (सेंसर बोर्ड) के दायरे में नहीं आएगा। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
OTT कंटेंट कैसे रेगुलेट होता है?
सरकार के अनुसार, OTT प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियम 2021 (Information Technology Rules, 2021) के तहत रेगुलेट किया जाता है, न कि CBFC के तहत।
इन नियमों में OTT के लिए ये बातें जरूरी हैं:
- कानून के खिलाफ कंटेंट नहीं दिखाया जाएगा
- कंटेंट की Age-Based Rating (U, U/A, A आदि) करनी होगी
- बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित कंटेंट सुनिश्चित करना होगा
शिकायत होने पर क्या सिस्टम है?
OTT कंटेंट को लेकर शिकायतों के लिए 3-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है:
- Level-1:
- खुद OTT प्लेटफॉर्म अपनी शिकायत सुलझाएगा (Self-Regulation)
- Level-2:
- OTT प्लेटफॉर्म्स की बनी हुई Self-Regulatory Body देखेगी
- Level-3:
- अंत में केंद्र सरकार का Oversight Mechanism होगा
सरकार ने बताया कि OTT से जुड़ी शिकायतें पहले Level-1 यानी सीधे OTT प्लेटफॉर्म को भेजी जाती हैं।
CBFC की भूमिका क्या है?
- CBFC सिर्फ फिल्मों के लिए है, जो सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं
- CBFC की स्थापना Cinematograph Act, 1952 के तहत हुई थी
- OTT कंटेंट पर CBFC का कोई अधिकार नहीं है
सरकार का सख्त रुख
डॉ. मुरुगन ने कहा:
- सरकार एक Safe, Trusted और Accountable Internet चाहती है
- अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्ती की जाएगी
- अब तक 43 OTT प्लेटफॉर्म्स को भारत में बैन / ब्लॉक किया जा चुका है, क्योंकि वे अश्लील कंटेंट दिखा रहे थे
विश्लेषण
- सरकार OTT पर सीधा सेंसर नहीं लगा रही, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह हटाया भी नहीं है
- OTT को आज़ादी है, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
- Self-Regulation मॉडल से सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह बनाना चाहती है
- अश्लील या गैर-कानूनी कंटेंट पर सरकार कठोर कार्रवाई कर रही है, जिसका उदाहरण 43 OTT प्लेटफॉर्म्स पर बैन है
निष्कर्ष
OTT कंटेंट पर CBFC नहीं लगेगा, लेकिन आईटी नियम 2021 के तहत कड़ा कानून लागू रहेगा।
मतलब – आजादी भी है, और जवाबदेही भी।








