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  • Indian Railways: ट्रेन टिकट बुकिंग का असली “सीक्रेट” क्या है? तत्काल टिकट पाने के आसान ट्रिक्स, जानिए क्या न करें गलती

    रेलवे में सफर करने के लिए तत्काल टिकट सबसे तेज़ और आखिरी विकल्प माना जाता है। लेकिन इन टिकटों को बुक करना आसान नहीं होता, क्योंकि कुछ ही मिनटों में सारी सीटें भर जाती हैं। इसी वजह से लोग अक्सर सही ट्रिक नहीं जान पाने के कारण टिकट से चूक जाते हैं।

    आज हम आपको ऐसे आसान और काम के ट्रिक्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप तत्काल टिकट पाने की संभावना बढ़ा सकते हैं।

    क्यों मुश्किल होता है तत्काल टिकट?

    तत्काल टिकट की मांग बहुत ज्यादा होती है। जैसे ही IRCTC पर बुकिंग शुरू होती है, कुछ ही सेकंड में सीटें खत्म हो जाती हैं। इसलिए तेज़ी और सही तैयारी सबसे जरूरी होती है।

    ये ट्रिक्स अपनाएं और बढ़ाएं टिकट मिलने के चांस

    1. पैसेंजर डिटेल पहले से सेव करें

    बुकिंग के समय नाम, उम्र और जेंडर भरने में समय लगता है। इसलिए पहले से IRCTC में “Master List” बनाकर सभी यात्रियों की डिटेल सेव कर लें।

    2. पेमेंट में समय न गंवाएं

    OTP वाले बैंक पेमेंट में समय लगता है। इसकी जगह UPI या IRCTC वॉलेट का इस्तेमाल करें ताकि पेमेंट तुरंत हो सके।

    3. सही समय पर लॉगिन करें

    बुकिंग शुरू होने से 20–30 मिनट पहले लॉगिन कर लें ताकि सिस्टम से बाहर होने का खतरा न रहे। इससे आप तैयार स्थिति में रहेंगे।

    4. डेस्टिनेशन और डिटेल्स तैयार रखें

    गंतव्य, पिन कोड और अन्य जानकारी पहले से कॉपी करके रखें ताकि तुरंत पेस्ट कर सकें।

    5. एक से ज्यादा डिवाइस का इस्तेमाल करें

    मोबाइल और लैपटॉप दोनों पर लॉगिन करके रखें। अगर एक स्लो हो जाए तो दूसरे से तुरंत बुकिंग की जा सकती है।

    क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए?

    • बुकिंग के समय नई डिटेल भरने में समय न लगाएं
    • OTP पेमेंट को आखिरी विकल्प न बनाएं
    • आखिरी मिनट पर लॉगिन न करें
    • सिर्फ एक ही डिवाइस पर निर्भर न रहें

    विश्लेषण

    तत्काल टिकट बुकिंग एक “रेस” की तरह है, जहां सेकंड भी मायने रखते हैं। जो यात्री पहले से तैयारी करके बैठते हैं, उनके टिकट मिलने की संभावना ज्यादा होती है। हालांकि पूरी गारंटी नहीं होती, लेकिन सही रणनीति से सफलता के चांस जरूर बढ़ जाते हैं।

    FAQ

    1. क्या तत्काल टिकट मिलना आसान है?

    नहीं, यह बहुत तेज़ और प्रतिस्पर्धी बुकिंग सिस्टम है।

    2. सबसे अच्छा तरीका क्या है?

    पहले से लॉगिन, मास्टर लिस्ट और UPI पेमेंट सबसे मददगार हैं।

    3. क्या एक से ज्यादा डिवाइस उपयोग करना सही है?

    हां, इससे बुकिंग के चांस बढ़ जाते हैं।

    4. क्या IRCTC वॉलेट बेहतर है?

    हां, यह पेमेंट को तेज़ बनाता है।

    5. क्या ये ट्रिक्स 100% गारंटी देती हैं?

    नहीं, लेकिन सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

  • Small Business Ideas: घर पर खाली बैठे हैं? ये 5 छोटे बिजनेस शुरू कर हर महीने कमा सकते हैं लाखों रुपये

    अगर आप घर पर खाली समय बिता रहे हैं और कम निवेश में कमाई का कोई अच्छा तरीका तलाश रहे हैं, तो छोटे व्यवसाय (Small Business) आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। आज के समय में कई ऐसे बिजनेस हैं जिन्हें घर से शुरू करके अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।

    खासकर महिलाओं, गृहिणियों और युवाओं के लिए ये बिजनेस कम लागत में शुरू किए जा सकते हैं और धीरे-धीरे बड़े उद्यम का रूप ले सकते हैं।

    1. ब्रेड बनाने का बिजनेस

    ब्रेड की मांग हर शहर और कस्बे में बनी रहती है। करीब 10,000 रुपये के निवेश से इस बिजनेस की शुरुआत की जा सकती है। घर पर तैयार की गई ब्रेड को स्थानीय दुकानों, होटलों और बेकरी में सप्लाई किया जा सकता है।

    2. मोमबत्ती (कैंडल) बनाने का बिजनेस

    आजकल मोमबत्तियों का उपयोग केवल बिजली जाने पर ही नहीं, बल्कि सजावट और गिफ्टिंग के लिए भी किया जाता है। 10,000 से 20,000 रुपये के निवेश में यह बिजनेस शुरू किया जा सकता है।

    3. चॉक बनाने का बिजनेस

    स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में चॉक की लगातार जरूरत रहती है। कम लागत और सरल उत्पादन प्रक्रिया के कारण यह एक अच्छा घरेलू व्यवसाय माना जाता है।

    4. लिफाफा (एनवेलप) बनाने का बिजनेस

    कम पूंजी में शुरू होने वाले व्यवसायों में लिफाफा निर्माण भी शामिल है। इसे घर से संचालित किया जा सकता है और स्टेशनरी दुकानों तथा कार्यालयों में इसकी आपूर्ति की जा सकती है।

    5. होम कैंटीन बिजनेस

    अगर आपको खाना बनाना पसंद है तो घर से टिफिन या कैंटीन सेवा शुरू कर सकते हैं। छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और ऑफिस कर्मचारियों के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विश्लेषण

    इन सभी व्यवसायों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें कम निवेश और सीमित संसाधनों के साथ शुरू किया जा सकता है। हालांकि “हर महीने लाखों की कमाई” व्यवसाय के पैमाने, ग्राहक संख्या और मार्केटिंग पर निर्भर करती है। सही योजना और निरंतर मेहनत से ये छोटे बिजनेस भविष्य में बड़े कारोबार का रूप ले सकते हैं।

    FAQ

    1. सबसे कम निवेश वाला बिजनेस कौन सा है?

    चॉक और लिफाफा बनाने का व्यवसाय कम निवेश में शुरू किया जा सकता है।

    2. क्या महिलाएं घर से ये बिजनेस कर सकती हैं?

    हां, सभी बताए गए बिजनेस घर से संचालित किए जा सकते हैं।

    3. होम कैंटीन बिजनेस में कितनी कमाई हो सकती है?

    कमाई ग्राहकों की संख्या और सेवा क्षेत्र पर निर्भर करती है।

    4. क्या ब्रेड बिजनेस लाभदायक है?

    यदि स्थानीय बाजार और सप्लाई नेटवर्क अच्छा हो तो यह लाभदायक व्यवसाय बन सकता है।

    5. क्या इन बिजनेस के लिए बड़ी पूंजी चाहिए?

    नहीं, अधिकांश व्यवसाय 10,000 से 20,000 रुपये के शुरुआती निवेश से शुरू किए जा सकते हैं।

  • सोना महंगा नहीं हुआ, डॉलर की कीमत गिर रही है: रॉबर्ट कियोसाकी

    ‘रिच डैड पुअर डैड’ किताब के लेखक और मशहूर निवेशक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था और डॉलर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि सोना महंगा नहीं हो रहा, बल्कि अमेरिकी डॉलर की कीमत लगातार गिर रही है।

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    सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में कियोसाकी ने कहा कि लोग समझते हैं कि सोने की कीमत बढ़ रही है, जबकि असल में डॉलर की खरीदने की ताकत कम हो रही है।

    क्या कहा कियोसाकी ने?

    कियोसाकी के अनुसार लोग यह मानते हैं कि उनकी सैलरी बढ़ रही है, लेकिन वास्तव में महंगाई की वजह से मुद्रा की वैल्यू कम हो रही है। यानी लोगों को ज्यादा नोट मिल रहे हैं, लेकिन उनकी असली संपत्ति नहीं बढ़ रही।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उनके एक दोस्त ने कई साल पहले 10 हजार डॉलर में घर खरीदा था, जिसकी कीमत आज 7.5 लाख डॉलर हो चुकी है। वहीं उसी समय ली गई 10 हजार डॉलर की जीवन बीमा पॉलिसी की वैल्यू आज भी लगभग उतनी ही है।

    उनका कहना है कि जो संपत्तियां महंगाई के साथ बढ़ती हैं, वही लंबे समय में धन बचाने में मदद करती हैं।

    1971 के बाद डॉलर ने खोई ताकत

    कियोसाकी ने दावा किया कि 1971 के बाद अमेरिकी डॉलर अपनी 93 प्रतिशत खरीद क्षमता खो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकारें जरूरत से ज्यादा पैसा छापती हैं, जिससे धीरे-धीरे मुद्रा कमजोर होती जाती है।

    उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अमेरिका ने भारी मात्रा में पैसा छापा, जिससे महंगाई और बढ़ी।

    किन चीजों में निवेश की सलाह?

    कियोसाकी ने लोगों को सिर्फ नकद डॉलर बचाने के बजाय असली संपत्तियों में निवेश की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोना, चांदी, बिटकॉइन और जमीन जैसी संपत्तियां लंबे समय में धन को सुरक्षित रखने में मदद कर सकती हैं।

    उनके अनुसार हजारों सालों से सोना अपनी वैल्यू बनाए हुए है, जबकि कागजी मुद्राएं समय के साथ कमजोर होती जाती हैं।

    विश्लेषण

    रॉबर्ट कियोसाकी लंबे समय से फिएट करेंसी यानी सरकारी मुद्रा व्यवस्था की आलोचना करते रहे हैं। उनका मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई आम लोगों की बचत को कमजोर कर रही है।

    हालांकि सभी अर्थशास्त्री उनकी बातों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना और अन्य वास्तविक संपत्तियों में निवेश की चर्चा लगातार बढ़ रही है।

    FAQ

    1. रॉबर्ट कियोसाकी कौन हैं?

    वे ‘रिच डैड पुअर डैड’ किताब के लेखक और प्रसिद्ध निवेशक हैं।

    2. कियोसाकी ने सोने को लेकर क्या कहा?

    उन्होंने कहा कि सोना महंगा नहीं हो रहा, बल्कि डॉलर की कीमत गिर रही है।

    3. उन्होंने किन निवेश विकल्पों की सलाह दी?

    सोना, चांदी, बिटकॉइन और जमीन जैसी वास्तविक संपत्तियों में निवेश की सलाह दी।

    4. डॉलर की खरीद क्षमता को लेकर क्या दावा किया?

    उनके अनुसार 1971 के बाद डॉलर ने अपनी 93 प्रतिशत खरीद क्षमता खो दी है।

    5. कियोसाकी क्यों चर्चा में हैं?

    उनके आर्थिक और निवेश संबंधी बयान अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं।

  • Norway Chess 2026: मैग्नस कार्लसन ने विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराया

    विश्व नंबर-1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन ने Norway Chess 2026 के चौथे राउंड में मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश को हराया। यह मुकाबला गुरुवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में खेला गया।

    कार्लसन ने काले मोहरों से खेलते हुए धीरे-धीरे मैच पर पकड़ बनाई और क्लासिकल गेम में शानदार जीत दर्ज की।

    Gukesh Dommaraju, the reigning World Chess Champion from India, attends a press conference ahead of the FIDE World Rapid & Blitz Championships 2025 in Doha, Qatar, on December 25, 2025. (Photo by Noushad Thekkayil/NurPhoto via Getty Images)

    कैसे हुआ मुकाबला?

    शुरुआत में मुकाबला काफी संतुलित रहा। दोनों खिलाड़ियों ने सावधानी से चालें चलीं। लेकिन मिडिल गेम में कार्लसन ने मौके का फायदा उठाया और गुकेश पर दबाव बढ़ा दिया।

    समय की कमी और मुश्किल स्थिति के कारण गुकेश अपनी पकड़ बनाए नहीं रख सके और अंत में कार्लसन ने जीत हासिल कर ली।

    कार्लसन के लिए क्यों अहम है यह जीत?

    Norway Chess 2026 में कार्लसन की शुरुआत ज्यादा मजबूत नहीं रही थी। ऐसे में विश्व चैंपियन गुकेश के खिलाफ मिली यह जीत उनके आत्मविश्वास और अंक तालिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इस जीत के बाद कार्लसन की स्थिति टूर्नामेंट में काफी बेहतर हो गई है।

    अन्य मुकाबलों का हाल

    प्रग्गनानंधा ने आर्मागेडन जीता

    आर. प्रग्गनानंधा और विंसेंट कीमर के बीच क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ रहा। इसके बाद हुए आर्मागेडन टाईब्रेकर में प्रग्गनानंधा ने जीत दर्ज की।

    वेस्ली सो ने फिरोजा को हराया

    वेस्ली सो और अलीरेजा फिरोजा का क्लासिकल मैच भी ड्रॉ रहा, लेकिन आर्मागेडन में सो ने जीत हासिल की।

    महिला वर्ग में क्या हुआ?

    महिला वर्ग में भी सभी क्लासिकल मुकाबले ड्रॉ रहे। इसके बाद आर्मागेडन मुकाबलों से विजेता तय हुए।

    • झू जिनर ने कोनेरू हम्पी को हराया
    • बिबीसारा असाउबायेवा ने जू वेनजुन को मात दी
    • अन्ना मुजिचुक ने दिव्या देशमुख के खिलाफ आर्मागेडन जीता

    अंक तालिका में कौन आगे?

    चार राउंड के बाद अलीरेजा फिरोजा ओपन वर्ग में शीर्ष पर बने हुए हैं। वहीं महिला वर्ग में बिबीसारा असाउबायेवा बढ़त बनाए हुए हैं।

    विश्लेषण

    यह मुकाबला दिखाता है कि मैग्नस कार्लसन अभी भी दुनिया के सबसे खतरनाक और अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं। गुकेश ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन दबाव में अनुभव की कमी साफ नजर आई।

    हालांकि गुकेश के लिए यह हार सीखने का बड़ा मौका भी है। कम उम्र में विश्व चैंपियन बनने के बाद अब उनसे लगातार शीर्ष स्तर का प्रदर्शन अपेक्षित है। दूसरी ओर कार्लसन ने साबित किया कि बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव अभी भी सबसे बड़ी ताकत है।

    FAQ

    1. Norway Chess 2026 में गुकेश को किसने हराया?

    मैग्नस कार्लसन ने गुकेश को चौथे राउंड में हराया।

    2. मुकाबला कहां खेला गया?

    यह मैच नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में खेला गया।

    3. कार्लसन ने कौन से मोहरों से खेला?

    कार्लसन ने काले मोहरों से खेलते हुए जीत हासिल की।

    4. प्रग्गनानंधा ने क्या हासिल किया?

    उन्होंने आर्मागेडन टाईब्रेकर जीतकर बोनस अंक हासिल किए।

    5. महिला वर्ग में कौन आगे चल रहा है?

    बिबीसारा असाउबायेवा महिला वर्ग की अंक तालिका में शीर्ष पर हैं।

  • NEET-UG 2026 री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा, धर्मेंद्र प्रधान और पूर्व ISRO प्रमुख ने की बैठक

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक कर NEET-UG 2026 री-एग्जाम की तैयारियों की समीक्षा की। यह परीक्षा 21 जून को आयोजित होगी।

    बैठक में परीक्षा सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों पर सुविधाओं को लेकर चर्चा की गई। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं।

    क्या चर्चा हुई बैठक में?

    बैठक में उच्च शिक्षा सचिव, NTA के महानिदेशक, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और NTA प्रतिनिधि मौजूद रहे। NTA अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की जानकारी दी।

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। साथ ही छात्रों को परीक्षा केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं और अनुकूल माहौल मिलना भी जरूरी है।

    कौन हैं के. राधाकृष्णन?

    के. राधाकृष्णन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में वे उस हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी के प्रमुख हैं, जिसे राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़ी सुधार सिफारिशों को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है।

    क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?

    पिछले वर्षों में NEET परीक्षा को लेकर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। ऐसे में सरकार इस बार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है।

    सरकार का उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों का भरोसा दोबारा मजबूत करना है।

    कितने केंद्रों पर होगी परीक्षा?

    NEET-UG 2026 री-एग्जाम 21 जून को देशभर के 550 शहरों में स्थित 5,400 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा।

    यह बैठक दिखाती है कि केंद्र सरकार NEET परीक्षा की साख बचाने के लिए गंभीर है। ISRO जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व प्रमुख को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करना सरकार की रणनीतिक पहल मानी जा रही है।

    हालांकि केवल सुरक्षा बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही को लगातार मजबूत करना जरूरी रहेगा। छात्रों का विश्वास तभी लौटेगा जब परीक्षा बिना किसी विवाद के सफलतापूर्वक संपन्न होगी।

    FAQ

    1. NEET-UG 2026 री-एग्जाम कब होगा?

    यह परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी।

    2. बैठक की अध्यक्षता किसने की?

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बैठक की अध्यक्षता की।

    3. के. राधाकृष्णन कौन हैं?

    वे ISRO के पूर्व अध्यक्ष हैं और NTA सुधार समिति के प्रमुख हैं।

    4. परीक्षा कितने केंद्रों पर होगी?

    देशभर में 5,400 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा आयोजित होगी।

    5. बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था?

    परीक्षा सुरक्षा मजबूत करना और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करना।

  • NTR को PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा – उनके आदर्श आज भी प्रेरणा हैं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को तेलुगु सिनेमा के महान अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नंदमुरी तारक रामाराव (NTR) की 103वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि NTR का जीवन, उनके आदर्श और जनता के लिए किया गया काम आज भी लोगों को प्रेरित करता है।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि NTR गरीबों और वंचितों के सम्मान और कल्याण के लिए हमेशा समर्पित रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सिनेमा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में NTR का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

    कौन थे NTR?

    नंदमुरी तारक रामाराव, जिन्हें लोग प्यार से NTR कहते थे, तेलुगु सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 28 मई 1923 को आंध्र प्रदेश के निम्माकुरु गांव में हुआ था।

    उन्होंने शुरुआत में सरकारी नौकरी की, लेकिन बाद में अभिनय के लिए नौकरी छोड़ दी। 1949 में फिल्म मना देशम से उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

    फिल्मों में क्यों थे इतने लोकप्रिय?

    NTR खास तौर पर भगवान राम और भगवान कृष्ण जैसे पौराणिक किरदार निभाने के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी फिल्में माया बाजार और दाना वीरा सूरा कर्णा आज भी तेलुगु सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती हैं।

    लोग उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक मानते थे। उनकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि लोग उन्हें असली भगवान जैसा सम्मान देते थे।

    राजनीति में कैसे आए?

    60 साल की उम्र में NTR ने राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) बनाई। उनका मुख्य मुद्दा था “तेलुगु स्वाभिमान” यानी तेलुगु लोगों का सम्मान और अधिकार।

    1983 के चुनाव में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की और कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। वे संयुक्त आंध्र प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने।

    जनता के लिए क्या काम किए?

    NTR ने कई जनकल्याण योजनाएं शुरू कीं। उनमें सबसे प्रसिद्ध थी गरीबों को 2 रुपये किलो चावल देने की योजना। उन्होंने गांवों के विकास और गरीब वर्ग के लिए कई योजनाएं लागू कीं।

    उनकी राजनीति आम जनता और गरीबों के मुद्दों पर आधारित मानी जाती थी।

    राजनीतिक संघर्ष भी देखा

    1984 में इलाज के दौरान उन्हें सत्ता से हटाने की कोशिश हुई, लेकिन जनता के भारी समर्थन के बाद वे फिर मुख्यमंत्री बने। यह घटना भारतीय राजनीति में एक बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

    हालांकि 1995 में उनके दामाद एन. चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी की कमान संभाल ली।

    निधन और विरासत

    जनवरी 1996 में हार्ट अटैक के कारण NTR का निधन हो गया। लेकिन आज भी आंध्र प्रदेश की राजनीति और तेलुगु सिनेमा में उनका प्रभाव साफ दिखाई देता है।

    क्यों आज भी याद किए जाते हैं NTR?

    NTR सिर्फ अभिनेता या नेता नहीं थे, बल्कि वे लोगों की भावनाओं से जुड़े हुए थे। उन्होंने सिनेमा के जरिए सांस्कृतिक पहचान बनाई और राजनीति में लोगों को सम्मान और कल्याण का भरोसा दिया।

    उनकी सबसे बड़ी ताकत थी जनता से सीधा जुड़ाव। आज भी तेलुगु देशम पार्टी और आंध्र प्रदेश की राजनीति में उनका नाम एक बड़े प्रेरणास्रोत के रूप में लिया जाता है।

    PM मोदी और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा दी गई श्रद्धांजलि यह दिखाती है कि NTR की लोकप्रियता और प्रभाव आज भी बरकरार है।

    FAQ

    1. NTR कौन थे?

    NTR यानी नंदमुरी तारक रामाराव तेलुगु फिल्मों के महान अभिनेता और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे।

    2. NTR ने कौन सी पार्टी बनाई थी?

    उन्होंने 1982 में तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की थी।

    3. NTR किस वजह से प्रसिद्ध थे?

    वे फिल्मों में भगवान राम और कृष्ण के किरदार निभाने और गरीबों के लिए योजनाएं चलाने के कारण प्रसिद्ध थे।

    4. NTR की सबसे लोकप्रिय योजना कौन सी थी?

    गरीबों को 2 रुपये किलो चावल देने की योजना उनकी सबसे प्रसिद्ध योजनाओं में से एक थी।

    5. NTR का निधन कब हुआ?

    जनवरी 1996 में हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हुआ।

    Source – INS

  • OTT कंटेंट पर CBFC लागू नहीं होगा: सरकार का लोकसभा में जवाब

    केंद्र सरकार ने साफ किया है कि OTT प्लेटफॉर्म (Netflix, Amazon Prime, Hotstar आदि) का कंटेंट CBFC (सेंसर बोर्ड) के दायरे में नहीं आएगा। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी।


    OTT कंटेंट कैसे रेगुलेट होता है?

    सरकार के अनुसार, OTT प्लेटफॉर्म्स को आईटी नियम 2021 (Information Technology Rules, 2021) के तहत रेगुलेट किया जाता है, न कि CBFC के तहत।

    इन नियमों में OTT के लिए ये बातें जरूरी हैं:

    • कानून के खिलाफ कंटेंट नहीं दिखाया जाएगा
    • कंटेंट की Age-Based Rating (U, U/A, A आदि) करनी होगी
    • बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित कंटेंट सुनिश्चित करना होगा

    शिकायत होने पर क्या सिस्टम है?

    OTT कंटेंट को लेकर शिकायतों के लिए 3-स्तरीय व्यवस्था बनाई गई है:

    1. Level-1:
      • खुद OTT प्लेटफॉर्म अपनी शिकायत सुलझाएगा (Self-Regulation)
    2. Level-2:
      • OTT प्लेटफॉर्म्स की बनी हुई Self-Regulatory Body देखेगी
    3. Level-3:
      • अंत में केंद्र सरकार का Oversight Mechanism होगा

    सरकार ने बताया कि OTT से जुड़ी शिकायतें पहले Level-1 यानी सीधे OTT प्लेटफॉर्म को भेजी जाती हैं।


    CBFC की भूमिका क्या है?

    • CBFC सिर्फ फिल्मों के लिए है, जो सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं
    • CBFC की स्थापना Cinematograph Act, 1952 के तहत हुई थी
    • OTT कंटेंट पर CBFC का कोई अधिकार नहीं है

    सरकार का सख्त रुख

    डॉ. मुरुगन ने कहा:

    • सरकार एक Safe, Trusted और Accountable Internet चाहती है
    • अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्ती की जाएगी
    • अब तक 43 OTT प्लेटफॉर्म्स को भारत में बैन / ब्लॉक किया जा चुका है, क्योंकि वे अश्लील कंटेंट दिखा रहे थे

    विश्लेषण

    • सरकार OTT पर सीधा सेंसर नहीं लगा रही, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह हटाया भी नहीं है
    • OTT को आज़ादी है, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
    • Self-Regulation मॉडल से सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह बनाना चाहती है
    • अश्लील या गैर-कानूनी कंटेंट पर सरकार कठोर कार्रवाई कर रही है, जिसका उदाहरण 43 OTT प्लेटफॉर्म्स पर बैन है

    निष्कर्ष

    OTT कंटेंट पर CBFC नहीं लगेगा, लेकिन आईटी नियम 2021 के तहत कड़ा कानून लागू रहेगा
    मतलब – आजादी भी है, और जवाबदेही भी।

  • Renewable Energy Boom: भारत में नॉन-फॉसिल पावर का ऐतिहासिक विस्तार, ओडिशा को मिलेगा सोलर पावर बूस्ट

    भारत में स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार तेज रफ्तार से जारी है और वर्ष 2025-26 की शुरुआत ने इस दिशा में नया इतिहास रच दिया है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि भारत ने इस वित्त वर्ष में नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता वृद्धि का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। देश में कुल 31.25 गीगावाट नॉन-फॉसिल क्षमता जोड़ी गई है, जिसमें 24.28 गीगावाट सिर्फ सौर ऊर्जा शामिल है।

    पुरी में आयोजित Global Energy Leaders’ Summit 2025 में मंत्री ने ओडिशा के लिए एक बड़ा कदम घोषित किया — राज्य में Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत 1.5 लाख रूफटॉप सोलर यूनिट्स लगाई जाएंगी। इससे 7–8 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है।


    रिन्यूएबल एनर्जी में भारत का तेज उभार

    वैश्विक स्तर पर देखे तो नवीकरणीय ऊर्जा में तेजी से वृद्धि हो रही है। मंत्री जोशी ने बताया कि:

    • दुनिया को पहली 1 टेरावॉट क्षमता हासिल करने में 70 साल लगे।
    • लेकिन सिर्फ दो वर्षों (2022–2024) में वैश्विक क्षमता 2 टेरावॉट तक पहुँच गई।
    • इस वैश्विक तेजी में भारत का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है।

    भारत ने पिछले 11 वर्षों में सौर ऊर्जा की क्षमता 2.8 गीगावाट से बढ़कर लगभग 130 गीगावाट तक पहुंचाई है। यह 4,500% वृद्धि है — जो दुनिया के सबसे तेज ऊर्जा विस्तारों में शामिल है।

    साल 2022 से 2024 के बीच भारत ने अकेले 46 गीगावाट सौर क्षमता जोड़कर दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनने का रेकॉर्ड बनाया है।


    Renewable Energy Boom: भारत में नॉन-फॉसिल पावर का ऐतिहासिक विस्तार, ओडिशा को मिलेगा सोलर पावर बूस्ट

    भारत को क्यों जरूरी है सौर ऊर्जा का बड़ा विस्तार?

    भारत आज विश्व का:

    • पांचवां सबसे बड़ा कोयला भंडार रखने वाला देश है
    • और कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है

    इसके बावजूद देश नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता दे रहा है। कारण यह हैं:

    1. वैश्विक व्यापार दबाव

    दुनिया भर में कार्बन-न्यूट्रल नीतियां तेजी से लागू हो रही हैं। भारत को ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा अपनाना जरूरी है।

    2. ऊर्जा सुरक्षा

    आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करना राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है।
    सौर ऊर्जा भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकती है।

    3. बढ़ती घरेलू मांग

    भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण ऊर्जा की मांग को दोगुना कर देंगे।
    सौर ऊर्जा इस मांग को पूरा करने का सबसे सस्ता रास्ता है।


    ओडिशा में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर यूनिट: बड़ा बदलाव क्या होगा?

    Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत ओडिशा सरकार और केंद्र मिलकर घरों पर 1kW क्षमता वाले 1.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित करेंगे।

    इससे मिलने वाले लाभ:

    7–8 लाख लोगों को सीधा फायदा

    घरों का बिजली बिल 40–60% तक कम होगा।
    ग्रामीण और शहरी दोनों वर्गों को राहत मिलेगी।

    गरीब और कमजोर वर्गों के लिए ऊर्जा सुरक्षा

    कम आय वाले परिवारों को दीर्घकालिक बिजली राहत मिलेगी।

    बिजली कटौती में कमी

    सौर ऊर्जा ग्रिड पर दबाव कम करेगी, जिससे बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी।

    रोजगार सृजन

    सोलर इंस्टॉलेशन, सेवा और मेंटेनेंस क्षेत्र में हजारों नौकरियां बनेंगी।


    ओडिशा की स्वच्छ ऊर्जा प्रोफाइल: पहले से ही मजबूत

    ओडिशा रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने में पहले से अग्रणी माना जाता है:

    • राज्य में 3.1 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित है
    • यह राज्य की कुल बिजली क्षमता का लगभग 34% है

    PM Surya Ghar Yojana में शानदार प्रदर्शन

    • ओडिशा में 1.6 लाख आवेदन आए
    • इनमें से 23,000 से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे किए जा चुके हैं
    • 19,200 से अधिक परिवारों को 147 करोड़ रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजी गई है

    यह दिखाता है कि ओडिशा के लोग सौर ऊर्जा को जल्दी अपना रहे हैं और सरकार की नीतियां भी इस दिशा में प्रभावी हैं।


    केंद्र–राज्य साझेदारी: भारत की ऊर्जा क्रांति की असली ताकत

    प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में:

    • Investment-friendly policies
    • आसान प्रक्रियाएं और डिजिटल अप्रोच
    • केंद्र–राज्य मजबूत सहयोग
    • मांग आधारित योजनाएं

    इन सबने भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में दुनिया के टॉप देशों में शामिल कर दिया है।
    खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की पहुंच तेजी से बढ़ी है।


    Global Energy Leaders’ Summit 2025: क्या है महत्व?

    पुरी में 5 से 7 दिसंबर 2025 तक आयोजित यह समिट भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।

    यहां:

    • वैश्विक ऊर्जा लीडर्स
    • कंपनियां
    • स्टार्टअप्स
    • पॉलिसी मेकर्स

    — सब एक मंच पर आकर भविष्य की ऊर्जा रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
    ओडिशा में रूफटॉप सोलर यूनिट की घोषणा भी इसी समिट में हुई।


    विश्लेषण: भारत की ऊर्जा रणनीति सही दिशा में है?

    समग्र दृष्टि से देखें तो भारत दो पटरियों पर एक साथ आगे बढ़ रहा है:

    1. कोयला + नवीकरणीय ऊर्जा का संतुलन

    ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयला अचानक बंद नहीं किया जा सकता।
    लेकिन इसे धीरे-धीरे कम कर नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाना एक समझदारी भरा कदम है।

    2. घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा विस्तार

    रूफटॉप सोलर मॉडल से:

    • भारत की बिजली मांग का बड़ा हिस्सा स्थानीय रूप से पूरा होगा
    • वितरण कंपनियों का बोझ कम होगा
    • उपभोक्ताओं का खर्च घटेगा

    3. भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को सस्ती ऊर्जा मिलेगी

    सौर ऊर्जा का बढ़ना EV चार्जिंग लागत को काफी कम कर सकता है।
    यह भारत की EV क्रांति को भी तेज करेगा।


    निष्कर्ष: भारत की ऊर्जा का भविष्य सौर रोशनी से भरा

    ओडिशा में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर यूनिट लगाने का निर्णय सिर्फ एक राज्य योजना नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा भविष्य का संकेत है।
    भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
    आने वाले वर्षों में भारत सौर ऊर्जा का वैश्विक नेता बन सकता है — और यह यात्रा अभी और तेज होने वाली है। Source- PIB

  • पीएम मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को दी श्रद्धांजलि, कहा – उनका विजन पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 141वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान निर्माण और राष्ट्र निर्माण तक—डॉ. प्रसाद ने अतुलनीय समर्पण और दूरदर्शिता के साथ भारत की सेवा की।


    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद

    पीएम मोदी का संदेश

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ पर लिखा:

    “डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी से लेकर संविधान सभा की अध्यक्षता और पहले राष्ट्रपति बनने तक, उन्होंने गरिमा, समर्पण और स्पष्टता के साथ देश की सेवा की। उनकी दूरदर्शिता और सेवा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”


    सीएम योगी ने भी किया नमन

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी X पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद का आदर्श जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।

    उनके शब्दों में:

    “भारत के प्रथम राष्ट्रपति और महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। उनकी विनम्रता और राष्ट्रसेवा की भावना भारतीय लोकतंत्र की नींव को मजबूत करती है।”


    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा—”उनका योगदान अद्वितीय है”

    दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने X पर लिखा:

    “देश के प्रथम राष्ट्रपति ‘भारत रत्न’ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर सादर नमन। गणराज्य की नींव में स्थिरता और नैतिक मार्गदर्शन देने में उनका योगदान अतुलनीय है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर संविधान निर्माण तक उनका तपस्वी जीवन राष्ट्र के लिए आदर्श है।”


    डॉ. राजेंद्र प्रसाद: जीवन, योगदान और प्रमुख तथ्य

    नीचे दिए गए फैक्ट्स UPSC, SSC, Railway, State Exams और बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी काफी उपयोगी हैं।


    जीवन परिचय (Biography)

    विवरणजानकारी
    पूरा नामडॉ. राजेंद्र प्रसाद
    जन्म3 दिसंबर 1884, जिरादेई, बिहार
    पितामहादेव सहाय (फारसी और संस्कृत के विद्वान)
    शिक्षाप्रेसिडेंसी कॉलेज, कलकत्ता (Topper – Matriculation में प्रथम स्थान)
    व्यवसायवकील (प्रसिद्ध Barrister), प्रोफेसर, स्वतंत्रता सेनानी
    राजनीतिक भूमिकाभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता, सत्याग्रह में योगदान
    पहला पदसंविधान सभा के अध्यक्ष (1946–1950)
    भारत के पहले राष्ट्रपति26 जनवरी 1950 – 13 मई 1962 (सबसे लम्बे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रपति)
    मृत्यु28 फरवरी 1963

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद: प्रमुख योगदान

    1. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

    • चंपारण सत्याग्रह में गांधीजी के साथ प्रमुख भूमिका
    • असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय
    • जेल में कई बार कारावास

    2. संविधान सभा के अध्यक्ष

    • 1946 में संविधान सभा के पहले और एकमात्र अध्यक्ष चुने गए
    • पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संचालित किया

    3. भारत के पहले राष्ट्रपति

    • 1950 से 1962 तक लगातार दो बार पुन: चुने गए
    • देश के सबसे लंबे समय तक राष्ट्रपति रहने वाले नेता
    • अपनी सादगी, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के लिए जाने गए

    4. कृषि सुधारों में भूमिका

    • खाद्य और कृषि समिति के प्रमुख
    • भारत में कृषि नीति के प्रारंभिक ढांचे को मजबूत किया

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद – प्रमुख उपलब्धियां

    • भारत के एकमात्र राष्ट्रपति जिन्होंने दो बार से अधिक (12 वर्ष) सेवा की
    • गांधीजी उन्हें “राजेंद्र बाबू” कहकर बुलाते थे
    • स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपना घर और करियर छोड़ दिया
    • सरलता और त्याग के प्रतीक—राष्ट्रपति रहते हुए भी साधारण जीवन जीते थे
    • 1962 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया
    • उनकी आत्मकथा: “आत्मकथा” (Autobiography, 1946)
    • संविधान सभा का पहला भाषण: अत्यंत विनम्र और लोकतांत्रिक मूल्यों से भरपूर

    भारत के लिए उनका संदेश (Inspiration for Today)

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन यह सिखाता है कि—

    • सत्ता से ज्यादा महत्व नैतिकता और सेवा का है
    • नेतृत्व में सादगी और सत्यनिष्ठा सर्वोच्च हैं
    • राष्ट्र के प्रति समर्पण ही किसी नेता की सबसे बड़ी पहचान है

    निष्कर्ष

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद न केवल भारत के पहले राष्ट्रपति थे, बल्कि वे भारतीय लोकतंत्र की नैतिक आत्मा भी थे। आज पीएम मोदी, सीएम योगी और अन्य नेताओं ने जिस तरह उन्हें नमन किया, वह इस बात का प्रमाण है कि उनकी दूरदर्शिता और आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता के दौर में थे।


  • भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत: नीलगिरी क्लास स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ की डिलीवरी

    भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री शक्ति को एक बार फिर मजबूत कर लिया है। मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) ने नीलगिरी-क्लास (प्रोजेक्ट 17ए) के चौथे स्वदेशी एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ को आधिकारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया है। यह उपलब्धि न केवल नौसेना की सामरिक क्षमता को बढ़ाती है बल्कि भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी एक नया आयाम देती है।


    भारतीय नौसेना को एक और बड़ी ताकत मिली है।

    ‘तारागिरी’: भारत की नई पीढ़ी का स्टील्थ वॉरशिप

    ‘तारागिरी’ को भारतीय नौसेना के पुराने आईएनएस तारागिरी के आधुनिक रूप में विकसित किया गया है। पुराना जहाज 1980 से 2013 तक नौसेना का हिस्सा रहा था।
    नया फ्रिगेट उन्नत स्टेल्थ तकनीक, शक्तिशाली हथियार प्रणाली, और ऑटोमेशन आधारित ऑपरेशन से लैस है।

    यह न केवल समुद्र में दुश्मन की पकड़ से बच सकता है, बल्कि लंबी दूरी पर सटीक हमला करने की क्षमता भी रखता है।


    प्रोजेक्ट 17A: भारत की आत्मनिर्भर शिपबिल्डिंग की मिसाल

    ‘तारागिरी’ का डिजाइन वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने तैयार किया है, जबकि निर्माण की निगरानी वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (WOT), मुंबई ने की।
    पी17ए जहाज भारत की शिपबिल्डिंग में आत्मनिर्भरता (Aatmanirbhar Bharat) का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं:

    • 75% स्वदेशीकरण
    • 200+ MSMEs शामिल
    • 4,000 प्रत्यक्ष रोजगार
    • 10,000 अप्रत्यक्ष रोजगार

    यह पूरा प्रोजेक्ट भारतीय औद्योगिक क्षमता और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से बढ़ा रहा है।


    ‘तारागिरी’ की मुख्य विशेषताएं: क्या बनाता है इसे खास?

    1. स्टेल्थ तकनीक

    • जहाज समुद्र में रडार से कम दिखाई देता है
    • दुश्मन की नजरों से बचकर ऑपरेशन करने में सक्षम
    • आधुनिक नेवी वॉरफेयर की सबसे जरूरी तकनीकों में से एक

    2. शक्तिशाली हथियार प्रणाली

    ‘तारागिरी’ में मौजूद हथियार इसे एक मल्टी-रोल फ्रिगेट बनाते हैं:

    • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल (SSM)
    • MF-STAR मल्टी-फंक्शन रडार
    • मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम (MRSAM)
    • 76 mm सुपर रैपिड गन माउंट (SRGM)
    • 30 mm और 12.7 mm CIWS (क्लोज-इन वेपन सिस्टम)
    • रॉकेट और टॉरपीडो आधारित एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW)

    3. CODoG प्रोपल्शन सिस्टम

    • Combined Diesel or Gas (CODoG) तकनीक
    • डीजल इंजन + गैस टरबाइन
    • तेज गति, बेहतर ईंधन दक्षता और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता

    निर्माण में रिकॉर्ड सुधार: 81 महीने कम समय में पूरा

    भारतीय शिपबिल्डिंग क्षमता में लगातार सुधार हो रहा है।
    जहां पिछले जहाजों को तैयार होने में अधिक समय लगा, वहीं ‘तारागिरी’ लगभग 81 महीने कम समय में तैयार हुआ, यह दिखाता है:

    • देश में नौसैनिक जहाज बनाने की गति बढ़ी
    • शिपयार्ड की तकनीकी दक्षता में सुधार
    • उन्नत प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और इंडिजेनाइजेशन का फायदा

    नीलगिरी क्लास (P17A) में ‘तारागिरी’ का स्थान

    पी17ए के कुल 7 जहाज बनाए जा रहे हैं।
    ‘तारागिरी’ इनमें चौथा जहाज है:

    1. आईएनएस नीलगिरी
    2. आईएनएस उदयगिरि
    3. आईएनएस दुनागिरी
    4. आईएनएस तारागिरी (नया)

    इस जहाज के शामिल होने से नौसेना की फ्लीट शक्ति, समुद्री निगरानी, मिशन रेडीनेस, और ऑपरेशनल क्षमता और भी मजबूत होती है।


    रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है ‘तारागिरी’? (

    1. हिंद महासागर में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियाँ

    चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियाँ, पनडुब्बियों की तैनाती और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।

    2. तेज, स्टेल्थ और बहुउद्देश्यीय क्षमता

    ‘तारागिरी’ एक ही समय में:

    • एंटी-एयर
    • एंटी-सरफेस
    • एंटी-सबमरीन
      तीनों भूमिकाएँ निभा सकता है।

    3. “रक्षा में आत्मनिर्भरता” का प्रतीक

    75% स्वदेशीकरण यह दिखाता है कि भारत अब आयात पर निर्भर नहीं, बल्कि बड़ी रेंज के वॉरशिप खुद बना सकता है।

    4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत

    यह फ्रिगेट भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त देता है, जहां समुद्री शक्ति की भूमिका लगातार बढ़ रही है।


    FAQ: ‘तारागिरी’ फ्रिगेट से जुड़े आम सवाल

    Q1. ‘तारागिरी’ किस प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है?

    यह प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरी क्लास) के तहत बनाया गया है।

    Q2. क्या ‘तारागिरी’ पूरी तरह स्वदेशी है?

    लगभग 75% स्वदेशी, और भविष्य में यह प्रतिशत और बढ़ाया जाएगा।

    Q3. इसकी सबसे खास विशेषता क्या है?

    इसकी स्टेल्थ तकनीक, ब्रह्मोस मिसाइल, और आधुनिक रडार प्रणाली इसे बेहद घातक और आधुनिक बनाती है।

    Q4. यह जहाज किसने बनाया है?

    मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (MDL) ने इसे बनाया है।

    Q5. इसका सैन्य उपयोग क्या होगा?

    यह जहाज:

    • समुद्री निगरानी
    • मिसाइल हमले
    • पनडुब्बी रोधी ऑपरेशन
    • एयर डिफेंस
      के लिए उपयोग होगा।

    निष्कर्ष

    आईएनएस तारागिरी का भारतीय नौसेना में शामिल होना देश की सामरिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भर रक्षा नीति का बड़ा प्रमाण है।
    यह सिर्फ एक वॉरशिप नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और वैश्विक स्तर पर उभरती प्रतिष्ठा का प्रतीक है।

    source – ddnews