देश ने खोया एक अनमोल रत्न: अभिनेता नाना पाटेकर का निधन
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और एक सच्चे देशप्रेमी नाना पाटेकर का गोवा में निधन हो गया है। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने की है। नाना पाटेकर केवल अपने बेबाक अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के साथ 60 दिनों तक कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने के लिए भी याद किए जाएंगे। उनके निधन पर नितिन गडकरी और शुभेंदु अधिकारी सहित कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। (Source: TV9 Bharatvarsh) (Source: India TV)
प्रशासनिक और वित्तीय मोर्चे पर अहम फैसले
केंद्र सरकार ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए EPF और EPS के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है, जिससे पेंशन में करीब 66.6% की बढ़ोतरी होगी। दूसरी ओर, भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी की है, जिससे लोन की EMI महंगी हो जाएगी। वहीं, पेटीएम पेमेंट्स बैंक को RBI ने शेड्यूल्ड बैंकों की सूची से बाहर कर दिया है। (Source: Dainik Jagran)
कानून, सुरक्षा और राजनीतिक हलचल
महाराष्ट्र के हिंगोली में इंडियन ऑयल के अधिकारी महेश शेलके की ड्यूटी के दौरान चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मैनपावर सप्लाई के टेंडर को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसकी जांच की मांग हो रही है। दूसरी तरफ, बांबे हाई कोर्ट ने एमपीएससी परीक्षा में धांधली का विरोध कर रहे छात्रों के पक्ष में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वे असामाजिक तत्व नहीं हैं। (Source: Dainik Bhaskar) (Source: Dainik Jagran)
परीक्षाएं और जनसुविधाएं
झारखंड में JSSC CGL परीक्षा पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच में हैरान करने वाला सच सामने आया है, जहां एक कर्मचारी ने प्रश्नपत्र और उत्तर रट लिए थे। इसी बीच, छत्तीसगढ़ में 12,000 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती के तहत युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे जा रहे हैं। (Source: Prabhat Khabar)
मौसम और आपदा
उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ का कहर जारी है, जहां हजारों लोग प्रभावित हैं। उत्तराखंड में लैंडस्लाइड और छत्तीसगढ़ में ओलावृष्टि ने सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। (Source: Dainik Bhaskar)
निष्कर्ष
आज का दिन देश के लिए एक महान कलाकार को खोने का दुख लेकर आया, तो दूसरी तरफ प्रशासनिक सुधारों और सुरक्षा चुनौतियों पर कड़े रुख की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। क्या सिस्टम की यह जवाबदेही केवल कागजों तक सीमित रहेगी, या भविष्य में हम वास्तव में एक पारदर्शी व्यवस्था देख पाएंगे? यह सवाल हर नागरिक के मन में है।





