Lotus Cultivation: खेती में लगातार बढ़ती लागत और धान की फसल से उम्मीद के मुताबिक आमदनी नहीं होने के कारण किसान अब पारंपरिक खेती के अलावा नए प्रयोग भी कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के राजानगरम मंडल के कोत्तातुंगपाडु गांव में एक किसान पिता-पुत्र ने ऐसा ही अनोखा प्रयोग किया है। दोनों ने धान के खेत में कमल के फूलों की खेती शुरू की और अब खेत में खिले कमल लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।
धान के खेत में दिखाई दे रहे कमल के फूल
याल्ला वीरबाबू कई वर्षों से धान की खेती करते आ रहे हैं। हालांकि, फसल की उचित कीमत नहीं मिलने और मौसम की वजह से होने वाले नुकसान के कारण उन्हें खेती से अपेक्षित फायदा नहीं मिल रहा था। ऐसे में उन्होंने फसल बदलने के बारे में सोचा।
खेती में अपने पिता का हाथ बंटाने वाले उनके बेटे गंगाधर ने कमल की खेती का सुझाव दिया। गंगाधर ने अपने परिचित के जरिए 108 पंखुड़ियों वाले कमल की खेती के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद दोनों ने इसके बीज मंगवाए और जून में करीब एक एकड़ खेत में उनकी बुवाई की।
शुरुआत में खेत में छोटे-छोटे पौधे और कलियां दिखाई दीं। समय के साथ पौधे बढ़े और अब खेत में बड़ी संख्या में कमल के फूल खिल रहे हैं। आसपास से गुजरने वाले लोग भी इस अनोखी खेती को देखने के लिए रुक रहे हैं।
खेत में उगा रहे हैं 108 पंखुड़ियों वाले कमल
इस खेती की सबसे खास बात यहां उगाए जा रहे कमल के फूल हैं। किसान के मुताबिक, इन फूलों में करीब 108 पंखुड़ियां होने की बात बताई जा रही है। सामान्य कमल के मुकाबले इसकी अलग बनावट लोगों के बीच आकर्षण का कारण बनी हुई है।
त्योहारों के मौसम में कमल के फूलों की मांग बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए पिता-पुत्र ने इस खेती को आय का नया जरिया बनाने की कोशिश की है।
खेत से सीधे ग्राहकों को बेच रहे फूल
वीरबाबू ने केवल कमल उगाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने खेत के पास ही एक छोटी दुकान लगाकर सीधे ग्राहकों को फूल बेचना शुरू कर दिया है। यह जगह कोत्तातुंगपाडु-द्वारपुड़ी मुख्य सड़क के किनारे है, इसलिए वहां से गुजरने वाले लोग भी फूल खरीद रहे हैं।
किसान के मुताबिक, अब तक करीब 2,000 कमल के फूल बेचे जा चुके हैं। फूलों की कीमत मांग और आकार के हिसाब से करीब 10 से 30 रुपये प्रति फूल रखी गई है।
त्योहारों में बढ़ सकती है कमल की मांग
कमल के फूलों का इस्तेमाल पूजा-पाठ में बड़े स्तर पर किया जाता है। श्रावण मास, वरलक्ष्मी व्रत, गणेश चतुर्थी और दशहरा जैसे त्योहारों के दौरान फूलों की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
इसी वजह से किसान को उम्मीद है कि अगर फूलों की बिक्री इसी तरह जारी रही तो कमल की खेती धान के मुकाबले बेहतर आय का विकल्प बन सकती है।
बेटे की नौकरी के साथ खेती में भी दिलचस्पी
किसान के बेटे गंगाधर ने एमएससी साइबर फोरेंसिक की पढ़ाई की है और राजामहेंद्रवरम में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। इसके बावजूद वह बचपन से अपने पिता के साथ खेती में सहयोग करते रहे हैं।
गंगाधर के मुताबिक, धान की खेती से ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था। इसलिए इस बार कुछ अलग करने का विचार आया। एक परिचित से कमल की खेती के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसे एक एकड़ खेत में आजमाने का फैसला किया।
दूसरे किसानों के लिए बन सकता है नया प्रयोग
धान की खेती में बढ़ती लागत और कई तरह के जोखिमों के बीच किसान लगातार वैकल्पिक फसलों की तलाश कर रहे हैं। याल्ला वीरबाबू और उनके बेटे गंगाधर का यह प्रयोग इसी बदलाव की एक मिसाल है।
हालांकि, किसी भी वैकल्पिक फसल की तरह कमल की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय मिट्टी, पानी, बाजार, उत्पादन लागत और बिक्री की मांग के बारे में कृषि विशेषज्ञों से जानकारी लेना जरूरी है। इस किसान परिवार ने खेती के साथ सीधे ग्राहकों को बिक्री का रास्ता अपनाकर एक नया मॉडल जरूर पेश किया है।





