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चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावों पर किया फैक्ट चेक, जानिए क्या है पूरा सच🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावों पर किया फैक्ट चेक, जानिए क्या है पूरा सच

❌ वायरल दावा:
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के दावों पर किया फैक्ट चेक, जानिए क्या है पूरा सच
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हैं। • चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की तरफ से उठाए गए सवालों और दावों का कड़ा संज्ञान लेते हुए फैक्ट चेक किया है। • आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पूरा पालन किया जाता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर दिए गए बयानों के बाद राजनीति गरमा गई थी। राहुल गांधी ने लगातार SIR प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद अब चुनाव आयोग ने खुद इस मामले में दखल दिया है। आयोग ने राहुल गांधी के दावों की सच्चाई सामने लाने के लिए आधिकारिक तौर पर फैक्ट चेक किया है, जिससे जनता के सामने असली स्थिति स्पष्ट हो सके। लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के बीच बयानों का यह दौर नया नहीं है, लेकिन जब बात चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर आती है, तो तथ्यों की जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है। आयोग की तरफ से जारी इस फैक्ट चेक के बाद अब इस पूरे मामले पर नई बहस छिड़ने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि जनता के बीच सही जानकारी पहुंचना सबसे बड़ी जरूरत है।
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चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के फॉर्म 6 बदलने वाले दावे को बताया भ्रामक🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के फॉर्म 6 बदलने वाले दावे को बताया भ्रामक

❌ वायरल दावा:
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के फॉर्म 6 बदलने वाले दावे को बताया भ्रामक
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के फॉर्म 6 से जुड़े दावे को भ्रामक बताया है। - आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों के खिलाफ जाकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। - संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बिना पुख्ता तथ्यों के सवाल उठाना उचित नहीं है। चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के उस बयान का कड़ा जवाब दिया है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC से जुड़ा फॉर्म 6 अवैध तरीके से बदला गया है। आयोग की तरफ से साफ कर दिया गया है कि इस तरह के दावे पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि किसी भी महत्वपूर्ण पद या संस्था के खिलाफ बयानबाजी करने से पहले पुख्ता दस्तावेजों की जांच कर ली जाए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सार्वजनिक मंचों से बोलते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जब देश की सर्वोच्च संस्थाएं खुद आगे आकर स्थिति स्पष्ट करती हैं, तो आधे-अधूरे तथ्यों के आधार पर भ्रम फैलाने की गुंजाइश खत्म हो जानी चाहिए। जनता को भी ऐसे दावों पर आँख मूंदकर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक बयानों और तथ्यों पर ही ध्यान देना चाहिए।
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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में 22 बंदरों की हत्या का वायरल दावा, जांच में मिले दो कंकाल🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में 22 बंदरों की हत्या का वायरल दावा, जांच में मिले दो कंकाल

❌ वायरल दावा:
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में 22 बंदरों की हत्या का वायरल दावा, जांच में मिले दो कंकाल
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से 22 बंदरों की हत्या का वीडियो वायरल हुआ था। - प्रशासन ने 3 दिन जांच की, जिसमें 22 मौतों की पुष्टि नहीं हुई। - मौके से मिले 2 कंकालों को डीएनए और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या दावे को आंख मूंदकर सच मान लेना और उसे शेयर करना आज के दौर में एक बड़ी आदत बन चुका है। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया जहाँ 22 बंदरों की एयरगन से हत्या किए जाने का दावा करने वाला वीडियो धड़ल्ले से वायरल हो गया। इस सनसनीखेज दावे ने पशु प्रेमियों और आम जनता के बीच रोष पैदा कर दिया, लेकिन जब प्रशासनिक अमला और वन विभाग हरकत में आया और जमीनी हकीकत खंगाली, तो तस्वीर कुछ और ही निकली। तीन दिनों तक चली मैराथन जांच के बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वायरल दावे में जितनी संख्या बताई गई थी, वैसी 22 मौतों की पुष्टि मौके पर नहीं हुई है। हालांकि, जांच टीम को घटनास्थल से दो कंकाल जरूर मिले हैं। इन कंकालों को अब फॉरेंसिक और डीएनए जांच के लिए सुरक्षित भेज दिया गया है ताकि यह वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट हो सके कि ये कंकाल किसके हैं और मौत की असल वजह क्या थी। यह मामला हमें यह सिखाता है कि बिना पूरी जानकारी के किसी भी वायरल वीडियो पर भरोसा नहीं करना चाहिए। सोशल मीडिया के इस दौर में सेंसेशनल खबरें बहुत तेजी से फैलती हैं, लेकिन सच अक्सर जांच के बाद ही बाहर आता है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले से पर्दा उठेगा कि असल में वहां क्या हुआ था।
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कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका का दावा पीआईबी फैक्ट चेक में निकला गलत🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका का दावा पीआईबी फैक्ट चेक में निकला गलत

❌ वायरल दावा:
कॉकरोच जनता पार्टी के आशुतोष रांका का दावा पीआईबी फैक्ट चेक में निकला गलत
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - कॉकरोच जनता पार्टी लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा में बनी हुई है। - पार्टी के नेता आशुतोष रांका ने चुनाव आयोग को लेकर एक नया दावा सार्वजनिक किया था। - पीआईबी फैक्ट चेक ने इस दावे की पोल खोलते हुए इसे तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है। देश की राजनीतिक हलचल में बयानबाजी और दावों का दौर लगातार जारी रहता है। इसी कड़ी में कॉकरोच जनता पार्टी और चुनाव आयोग के बीच चल रहे बयानों के सिलसिले में एक नया मोड़ सामने आया है। पार्टी के नेता आशुतोष रांका द्वारा चुनाव आयोग के संदर्भ में एक ऐसा दावा पेश किया गया था, जो सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। जब इस दावे की जमीनी हकीकत और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर जांच की गई, तो पीआईबी फैक्ट चेक ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि नेता की ओर से दिया गया यह बयान सच की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। चुनावी और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में इस तरह के बिना जांचे-परखे दावे जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम करते हैं, जिस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।
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फिल्म शूटिंग के दौरान कथित तौर पर बांग्लादेशी झंडे फहराने का वीडियो वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

फिल्म शूटिंग के दौरान कथित तौर पर बांग्लादेशी झंडे फहराने का वीडियो वायरल

❌ वायरल दावा:
फिल्म शूटिंग के दौरान कथित तौर पर बांग्लादेशी झंडे फहराने का वीडियो वायरल
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें बांग्लादेशी झंडे नजर आ रहे हैं। • वायरल दावे में इसे अवैध प्रवासियों से जोड़ा जा रहा है, जबकि मामला फिल्म शूटिंग का है। • इस तरह के वीडियो अक्सर बिना पूरी सच्चाई जाने सनसनी फैलाने के लिए शेयर किए जाते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में हर वायरल वीडियो सच हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार फिल्मों या विज्ञापनों की शूटिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाले प्रॉप्स को लोग गलत मतलब निकालकर शेयर कर देते हैं। ऐसा ही कुछ इस मामले में भी देखने को मिला है, जहाँ फिक्शनल शूटिंग के दृश्यों को गंभीर मामलों से जोड़कर प्रसारित किया जा रहा है। जिम्मेदार नागरिकों का यह फर्ज बनता है कि वे किसी भी संवेदनशील वीडियो को आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। पुलिस और प्रशासन भी ऐसे मामलों में भ्रामक फैलाने वालों पर नजर बनाए रखते हैं। इसलिए, किसी भी पोस्ट पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना चाहिए और आधिकारिक बयानों का इंतजार करना चाहिए।
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हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यालय ने वायरल एआई तस्वीर की सच्चाई सामने लाने के लिए जारी किया मूल फुटेज🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यालय ने वायरल एआई तस्वीर की सच्चाई सामने लाने के लिए जारी किया मूल फुटेज

❌ वायरल दावा:
हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यालय ने वायरल एआई तस्वीर की सच्चाई सामने लाने के लिए जारी किया मूल फुटेज
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • असम के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक वायरल तस्वीर का सच सामने लाने के लिए मूल फुटेज जारी किया है। • कार्यालय का कहना है कि यह कदम यह दिखाने के लिए उठाया गया है कि तस्वीर को एआई और अन्य एडिटिंग टूल्स की मदद से कथित तौर परManipulate किया गया था। • प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जांचे ऐसे भ्रामक विजुअल्स पर भरोसा न करें। आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ करना बेहद आम हो गया है। सोशल मीडिया पर किसी भी सनसनीखेज दावे को बिना सोचे-समझे आगे बढ़ाने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। असम के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा उठाया गया यह कदम इस बात की मिसाल है कि भ्रामक सूचनाओं और फर्जी तस्वीरों का मुकाबला करने के लिए आधिकारिक और पारदर्शी बयानों की कितनी जरूरत होती है। इस पूरी घटना से यह बात साफ हो जाती है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर चमकती चीज या वायरल तस्वीर असलियत से कोसों दूर हो सकती है। तकनीक का गलत इस्तेमाल करके जनता को भ्रमित करने का यह खेल नया नहीं है, लेकिन इस पर लगाम कसने के लिए तकनीकी जागरूकता और प्रशासनिक मुस्तैदी दोनों की जरूरत है। अगली बार जब आपके फोन पर कोई ऐसा वायरल दावा पहुंचे, तो उसे फॉरवर्ड करने से पहले थोड़ा ठहरें और सच की पड़ताल करें।
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जंतर-मंतर 2.0 में पुलिस बर्बरता के दावों के साथ शेयर हो रहे पुराने वीडियो🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

जंतर-मंतर 2.0 में पुलिस बर्बरता के दावों के साथ शेयर हो रहे पुराने वीडियो

❌ वायरल दावा:
जंतर-मंतर 2.0 में पुलिस बर्बरता के दावों के साथ शेयर हो रहे पुराने वीडियो
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - जंतर-मंतर 2.0 में पुलिस बर्बरता के नाम पर पुराने वीडियो फैलाए जा रहे हैं। - बूम की पड़ताल में वायरल तीनों वीडियो पूरी तरह से असंबंधित और अलग समय के निकले। - इनमें से एक वीडियो उज्जैन, दूसरा 2020 के दिल्ली दंगों और तीसरा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का है। सोशल मीडिया के इस दौर में किसी भी वीडियो को सच मान लेना अब बहुत भारी पड़ सकता है। हाल ही में जंतर-मंतर 2.0 के नाम पर पुलिस बर्बरता के दावों के साथ कुछ वीडियो धड़ल्ले से शेयर किए जा रहे हैं। जब फैक्ट चेकर्स ने इन दावों की परतें उधेड़ीं, तो सच कुछ और ही निकला। बूम की पड़ताल में यह साफ हो गया कि वायरल हो रहे तीनों वीडियो का मौजूदा जंतर-मंतर की घटना से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। जांच में यह बात सामने आई कि इनमें से पहला वीडियो मध्य प्रदेश के उज्जैन का है, जहां किसी अन्य मामले में कार्रवाई हुई थी। दूसरा वीडियो साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों के दौरान का है, जिसे अब नया रंग देकर परोसा जा रहा है। वहीं, तीसरा वीडियो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुए प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज का है। इंटरनेट पर सनसनी फैलाने और लाइक-शेयर बटोरने के लिए इस तरह के पुराने और असंबंधित वीडियो का इस्तेमाल करना एक आम पैंतरा बन चुका है। जनता से अपील है कि ऐसे भ्रामक विजुअल्स पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और आगे भेजने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें।
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Fact Check: पुलिस लाठीचार्ज का यह वीडियो, मुख्‍य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन का नहीं है🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: पुलिस लाठीचार्ज का यह वीडियो, मुख्‍य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन का नहीं है

❌ वायरल दावा:
पुलिस लाठीचार्ज का यह वीडियो, मुख्‍य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन का नहीं है
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर मतभेद होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए 4 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर The post Fact
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CJP’s Abhijeet Dipke Slapped During Mumbai Protest? Old Video Goes Viral🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

CJP’s Abhijeet Dipke Slapped During Mumbai Protest? Old Video Goes Viral

❌ वायरल दावा:
CJP’s Abhijeet Dipke Slapped During Mumbai Protest? Old Video Goes Viral
✅ पड़ताल का सच:
The footage is from an earlier incident in Jaipur, Rajasthan, in June 2026, and has been falsely linked to the recent Mumbai protest.
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जाह्नवी कपूर का डीपफेक वीडियो वायरल, एक्ट्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति और नाराजगी🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

जाह्नवी कपूर का डीपफेक वीडियो वायरल, एक्ट्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति और नाराजगी

❌ वायरल दावा:
जाह्नवी कपूर का डीपफेक वीडियो वायरल, एक्ट्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति और नाराजगी
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - जाह्नवी कपूर का एक मॉर्फ्ड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। - एक्ट्रेस ने इसे AI डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल करार दिया है। - जाह्नवी ने इसे गंभीर यौन उत्पीड़न मानते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आजकल इंटरनेट की दुनिया में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल जितना आसान हो गया है, उसका गलत फायदा उठाना उतना ही खतरनाक। बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के साथ जो हुआ, वह किसी भी व्यक्ति की निजता और सम्मान पर सीधा हमला है। किसी के चेहरे को डिजिटल तरीके से बदलकर आपत्तिजनक वीडियो बनाना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। जाह्नवी कपूर ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इसे 'यौन उत्पीड़न' के बराबर बताया है। यह घटना दिखाती है कि कैसे तकनीक का इस्तेमाल करके किसी की छवि को धूमिल किया जा सकता है। यह सिर्फ एक सेलिब्रिटी का मामला नहीं है, बल्कि यह डिजिटल युग के उस काले सच को उजागर करता है जहाँ कोई भी व्यक्ति इस तरह की विकृत मानसिकता का शिकार हो सकता है।
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ती युवती का वीडियो वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ती युवती का वीडियो वायरल

❌ वायरल दावा:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पुलिसकर्मियों से भिड़ती युवती का वीडियो वायरल
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - जंतर-मंतर पर एक युवती और महिला पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प का वीडियो वायरल। - युवती को काबू करने के लिए 10 महिला पुलिसकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। - पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। दिल्ली के जंतर-मंतर से सामने आए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक युवती वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के घेरे को चुनौती दे रही है। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि युवती को नियंत्रित करने के लिए 10 महिला पुलिसकर्मियों को एक साथ मोर्चा संभालना पड़ा। प्रशासनिक व्यवस्था में अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जहाँ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव होता है। इस मामले में भी पुलिस ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए युवती को हिरासत में लिया। कानून के दायरे में रहकर विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन सुरक्षाकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार अक्सर कानूनी पेचीदगियों को जन्म देता है।
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सोशल मीडिया पर फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों के नाम पर वायरल हो रहे पुराने वीडियो का सच🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

सोशल मीडिया पर फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों के नाम पर वायरल हो रहे पुराने वीडियो का सच

❌ वायरल दावा:
सोशल मीडिया पर फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों के नाम पर वायरल हो रहे पुराने वीडियो का सच
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फ्रांस के छात्र प्रदर्शनों के दावे से कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। - इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ने इन वीडियो की गहराई से जांच की और पाया कि ये हालिया घटना से संबंधित नहीं हैं। - इंटरनेट पर बिना पुष्टि के किसी भी वीडियो को शेयर करना गलत सूचना को बढ़ावा देता है। आजकल सोशल मीडिया का दौर ऐसा हो गया है कि किसी भी पुरानी घटना को उठाकर आज का बता देना सबसे आसान काम बन गया है। लोग बिना यह सोचे-समझे कि वीडियो कब और कहाँ का है, उसे धड़ल्ले से शेयर करने लगते हैं। फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों से जुड़े नाम पर जो वीडियो अभी वायरल किए जा रहे हैं, उनकी असलियत कुछ और ही है। जब इस तरह के वायरल दावों की सच्चाई टटोली जाती है, तो सोशल मीडिया के इन सूरमाओं का सच सामने आ जाता है जो बिना सिर-पैर की खबरों को हवा देने में लगे रहते हैं। इसलिए अगली बार जब भी कोई ऐसा भ्रामक वीडियो आपकी स्क्रीन पर आए, तो आंख मूंदकर भरोसा करने की बजाय उसकी पड़ताल करना ही समझदारी है।
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कोलकाता दुर्गा पूजा में नॉनवेज खाने वालों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट? जानें सच🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

कोलकाता दुर्गा पूजा में नॉनवेज खाने वालों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट? जानें सच

❌ वायरल दावा:
कोलकाता दुर्गा पूजा में नॉनवेज खाने वालों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट? जानें सच
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - कोलकाता दुर्गा पूजा को लेकर सोशल मीडिया पर एक फर्जी दावा वायरल हो रहा है। - दावा किया गया कि नॉनवेज खाने वालों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट होगा, जो पूरी तरह झूठ है। - प्रशासन ने ऐसी किसी भी पाबंदी या टेस्ट की पुष्टि नहीं की है। दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में लाखों लोग पंडालों के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक अजीबोगरीब दावा वायरल हुआ कि जो लोग मांसाहारी भोजन करके आएंगे, उन्हें पंडाल में प्रवेश करने से पहले ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट से गुजरना होगा। यह खबर तेजी से फैली, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत है। न तो कोलकाता पुलिस और न ही किसी प्रमुख पूजा समिति ने ऐसा कोई नियम बनाया है। त्योहारों के समय अक्सर शरारती तत्व ऐसी भ्रामक खबरें फैलाते हैं ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं और व्यवस्था के बीच टकराव पैदा किया जा सके। आम जनता से अपील है कि ऐसी किसी भी खबर को बिना पुष्टि किए आगे न बढ़ाएं। त्योहारों का आनंद लें, लेकिन सोशल मीडिया पर तैरने वाली हर जानकारी को सच मानने की भूल न करें। आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी ही विश्वसनीय होती है।
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Fact Check: मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जुटी भीड़ के दावे से पुराना वीडियो वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जुटी भीड़ के दावे से पुराना वीडियो वायरल

❌ वायरल दावा:
मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर जुटी भीड़ के दावे से पुराना वीडियो वायरल
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच 2 अक्टूबर 2026 को दिल्ली और मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए थे। मुंबई के शिवाजी पार्क में भी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके The post Fact Check: मुंबई
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वाराणसी पुलिस दावा ग़लत; डांसर्स को रिकॉर्ड करते पुलिसकर्मियों का वायरल वीडियो असली है🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

वाराणसी पुलिस दावा ग़लत; डांसर्स को रिकॉर्ड करते पुलिसकर्मियों का वायरल वीडियो असली है

❌ वायरल दावा:
वाराणसी पुलिस दावा ग़लत; डांसर्स को रिकॉर्ड करते पुलिसकर्मियों का वायरल वीडियो असली है
✅ पड़ताल का सच:
29 सितंबर को पत्रकार पीयूष राय ने एक वीडियो शेयर किया. इसमें वाराणसी में बाबा लाट भैरव जुलूस के दौरान कुछ महिला कलाकारों को नाचते हुए देखते और रिकॉर्ड करते कई पुलिस अधिकारी दिखाई दिए. Men from UP police busy watching and recording women performers during the traditional Baba Lat Bhairav baarat proce
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किशनगंज के पांचगांछी में तेंदुए के हमले की खबर पूरी तरह अफवाह निकली🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

किशनगंज के पांचगांछी में तेंदुए के हमले की खबर पूरी तरह अफवाह निकली

❌ वायरल दावा:
किशनगंज के पांचगांछी में तेंदुए के हमले की खबर पूरी तरह अफवाह निकली
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - किशनगंज के पांचगांछी गांव में तेंदुए की मौजूदगी की खबर महज एक अफवाह साबित हुई। - वन विभाग की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच की और लोगों की आशंका को दूर किया। - जांच में सामने आया कि जिसे तेंदुआ समझा जा रहा था, वह असल में एक 'सिवेट कैट' थी। बिहार के किशनगंज जिले से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां पांचगांछी इलाके में तेंदुए के हमले की अफवाह ने कुछ समय के लिए पूरे गांव में हड़कंप मचा दिया था। लोग अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए थे और तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे थे। जब यह मामला वन विभाग के संज्ञान में आया, तो अधिकारियों ने बिना किसी देरी के अपनी टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया। मौके पर पहुंचकर जब वन विभाग के कर्मचारियों ने छानबीन की और सबूत जुटाए, तो साफ हो गया कि यह सिर्फ एक भ्रम था। गांव में कोई खतरनाक तेंदुआ नहीं आया था, बल्कि एक साधारण 'सिवेट कैट' घूम रही थी, जिसे देखकर ग्रामीणों में गलतफहमी फैल गई थी। प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर बिना सोचे-समझे किसी भी जंगली जानवर के हमले की झूठी खबरें फैलाना कानूनन गलत है और इससे समाज में अनावश्यक डर पैदा होता है। अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि ऐसी किसी भी सूचना पर तुरंत यकीन करने के बजाय स्थानीय प्रशासन या वन विभाग से संपर्क करें, ताकि सच्चाई सामने आ सके और बेवजह की अफवाहों पर लगाम लगाई जा सके।
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एफिल टॉवर पर महिलाओं को हटाने के फर्जी दावे की खुली पोल, आई जांच रिपोर्ट🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

एफिल टॉवर पर महिलाओं को हटाने के फर्जी दावे की खुली पोल, आई जांच रिपोर्ट

❌ वायरल दावा:
एफिल टॉवर पर महिलाओं को हटाने के फर्जी दावे की खुली पोल, आई जांच रिपोर्ट
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • BAPS पेरिस ने एफिल टॉवर से जुड़े वायरल दावे की आंतरिक जांच पूरी कर ली है। • जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि संस्था ने महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। • सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों के फैलाई जा रही बातों को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया गया है। पेरिस के एफिल टॉवर पर महिला कर्मचारियों को विजिट रूट से हटाने को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा था। इस पूरे मामले में अब BAPS पेरिस ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और जांच के बाद एक आधिकारिक बयान जारी किया है। संस्था का साफ कहना है कि उनकी तरफ से ऐसा कोई भी अनुरोध नहीं किया गया था कि दौरे के समय महिलाओं को वहां से हटाया जाए। आज के दौर में सोशल मीडिया पर किसी भी खबर को सच मान लेना और उसे आग की तरह फैला देना एक आम बात बन चुकी है। बिना यह सोचे-समझे कि इससे किसी संस्था या व्यवस्था की छवि पर क्या असर पड़ेगा, अफवाहें परोसी जाती हैं। इस खुलासे के बाद यह एक बार फिर साबित हो गया है कि इंटरनेट पर दिखने वाली हर तीखी और सनसनीखेज बात सच नहीं होती। सच्चाई की परतें जब खुलती हैं, तो ऐसे फर्जी दावों की हवा अपने आप निकल जाती है।
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर सड़क पर लेटी महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सड़क पर लेटी महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

❌ वायरल दावा:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सड़क पर लेटी महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला के हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। • महिला ने सड़क पर लेटकर पुलिस के सामने अभिनेता विजय थलपति से मिलने की अजीब मांग रखी। • इसी स्थान पर 2 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें 700 लोग हिरासत में लिए गए। सोशल मीडिया पर दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ा एक बेहद अजीबोगरीब वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला सड़क पर लेटी हुई नजर आ रही है और पुलिसकर्मियों को खुद को छूने से मना कर रही है। महिला की मांग है कि पहले तमिल अभिनेता विजय थलपति को बुलाया जाए, क्योंकि वह उन्हें गले लगाना चाहती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अजीबोगरीब घटना 29 सितंबर की बताई जा रही है, जिसने वहां मौजूद लोगों और पुलिस प्रशासन को हैरान कर दिया। इस वायरल वीडियो के इतर, जंतर-मंतर पर राजनीतिक हलचल भी तेज रही। आगामी 2 अक्टूबर को इसी स्थान पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने एसआईआर (SIR) और मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शन इतना उग्र था कि पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना पड़ा। प्रशासनिक स्तर पर जंतर-मंतर हमेशा से ही विभिन्न मांगों और प्रदर्शनों का केंद्र रहा है। लेकिन हाल के दिनों में यहां गंभीर मुद्दों के साथ-साथ इस तरह के अजीबोगरीब ड्रामे भी देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां लोग अपनी गंभीर मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के वायरल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। पुलिस प्रशासन के लिए इन दोनों ही तरह की परिस्थितियों को संभालना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
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क्या रेगुलर सीबीसी ब्लड टेस्ट से ब्लड कैंसर का पता चल सकता है?🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

क्या रेगुलर सीबीसी ब्लड टेस्ट से ब्लड कैंसर का पता चल सकता है?

❌ वायरल दावा:
क्या रेगुलर सीबीसी ब्लड टेस्ट से ब्लड कैंसर का पता चल सकता है?
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • क्या सामान्य सीबीसी टेस्ट से ब्लड कैंसर का पता लगाया जा सकता है? • इस सवाल को लेकर आम लोगों के बीच कई तरह के मिथक और भ्रम फैले हुए हैं। • इस विषय पर कैंसर विशेषज्ञों की राय से ही असली स्थिति स्पष्ट हो पाती है। लोगों के मन में अक्सर यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या खून की सामान्य जांच यानी सीबीसी (Complete Blood Count) के जरिए ब्लड कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता चल सकता है या यह महज एक मिथक है। आज के दौर में जहां स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, वहीं ऐसे मेडिकल सवालों के सही जवाब जानना हर आम नागरिक के लिए बेहद जरूरी हो जाता है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या डर से बचा जा सके। जब भी स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी बातें सामने आती हैं, तो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई तरह की अधूरी जानकारियां तैरने लगती हैं। लोग अक्सर बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद ही निष्कर्ष निकालने लगते हैं, जो सेहत के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि किसी भी बीमारी के लक्षणों या उसकी जांच के तरीकों को लेकर केवल डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की बातों पर ही भरोसा किया जाए। अंत में यही कहा जा सकता है कि सेहत से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार के भ्रम में रहने के बजाय सीधे किसी योग्य कैंसर विशेषज्ञ या डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। सही समय पर सही सलाह लेने से ही बीमारियों का समय रहते निदान संभव हो पाता है।
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क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान को 'शैतान' की पूजा के लिए उकसा रही है?🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान को 'शैतान' की पूजा के लिए उकसा रही है?

❌ वायरल दावा:
क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान को 'शैतान' की पूजा के लिए उकसा रही है?
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • कुछ लोगों का मानना है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी AI का स्वभाव ईसाइयत विरोधी हो सकता है। • तकनीक के विकास के साथ ही इसके नैतिक और धार्मिक प्रभावों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। • इस विवादित मान्यता के पीछे के तर्कों और दावों की गहराई से पड़ताल की जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया दिन-प्रतिदिन बड़ी होती जा रही है। एक तरफ जहां दुनिया भर के वैज्ञानिक और टेक कंपनियां इसे इंसानी बुद्धिमत्ता का सबसे बड़ा विकल्प बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ इसके सामाजिक और धार्मिक प्रभावों को लेकर आशंकाएं भी कम नहीं हो रही हैं। हाल ही में सामने आए एक नए विवाद ने इस चर्चा को और हवा दे दी है कि क्या तकनीक इंसानी आस्था और मान्यताओं के खिलाफ जा सकती है। तकनीकी जानकारों का मानना है कि AI इंसानी डेटा और पैटर्न के आधार पर काम करता है। ऐसे में यह किसी विशेष धर्म या विचारधारा के खिलाफ है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसे किस तरह का डेटा दिया जा रहा है। हालांकि, कुछ धड़ों में इसे लेकर गहरी चिंताएं हैं कि अत्यधिक तकनीक पर निर्भरता समाज को उसकी पारंपरिक जड़ों और मान्यताओं से दूर कर सकती है। यह पूरा विवाद इस बात की याद दिलाता है कि तकनीक सिर्फ एक औजार नहीं है, बल्कि यह इंसानी समाज के ताने-बाने को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। आने वाले समय में जैसे-जैसे AI का दायरा बढ़ेगा, ऐसे वैचारिक और दार्शनिक सवाल और अधिक जोर पकड़ेंगे।
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क्या एआई इंसानों को शैतान की पूजा के लिए उकसा रहा है?🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

क्या एआई इंसानों को शैतान की पूजा के लिए उकसा रहा है?

❌ वायरल दावा:
क्या एआई इंसानों को शैतान की पूजा के लिए उकसा रहा है?
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर समाज में कई तरह की मान्यताएं और आशंकाएं पनप रही हैं। - कुछ लोगों का यह अजीब तर्क है कि आधुनिक तकनीक और एआई सिस्टम ईसाइयत के खिलाफ हो सकते हैं। - तकनीक और धर्म के बीच की इस बहस ने एक बार फिर नए विवाद को जन्म दिया है। आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आज इंसानी जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। हेल्थकेयर से लेकर स्पेस साइंस तक, हर जगह एआई का डंका बज रहा है। लेकिन इसके साथ ही कुछ लोग इसे लेकर गंभीर शंकाएं भी जता रहे हैं। हाल ही में सामने आई एक विवादित मान्यता के अनुसार, कुछ लोगों का मानना है कि एआई तकनीक अंदरूनी तौर पर ईसाइयत विरोधी हो सकती है और यह इंसानों को गलत दिशा में ले जा सकती है। यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी नई तकनीक को लेकर इस तरह के दावे किए गए हों। इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में कोई बड़ा तकनीकी बदलाव आया है, समाज का एक वर्ग उसे लेकर आशंकित रहा है। कभी प्रिंटिंग प्रेस को तो कभी इंटरनेट को भी समाज के पतन का कारण बताया गया था। एआई के मामले में भी डर और अविश्वास का यह दौर चल रहा है, जहां वैज्ञानिक तरक्की को धार्मिक चश्मे से देखा जा रहा है। तकनीक अपने आप में न तो अच्छी होती है और न ही बुरी, उसका इस्तेमाल तय करता है कि उसका परिणाम क्या होगा। ऐसे में बिना ठोस तर्कों के एआई जैसी क्रांतिकारी तकनीक को लेकर ऐसी मान्यताएं फैलाना सिर्फ भ्रम पैदा करता है। जरूरत इस बात की है कि समाज अंधविश्वास और डर से बाहर निकलकर तकनीक के सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान दे।
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मोज़े में कच्चा प्याज़ रखकर सोने से ज़ुकाम-बुख़ार ठीक होने का सच जानिए🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

मोज़े में कच्चा प्याज़ रखकर सोने से ज़ुकाम-बुख़ार ठीक होने का सच जानिए

❌ वायरल दावा:
मोज़े में कच्चा प्याज़ रखकर सोने से ज़ुकाम-बुख़ार ठीक होने का सच जानिए
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • मोज़े में कच्चा प्याज़ रखकर सोने से बीमारी ठीक होने का दावा पूरी तरह निराधार है। • चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार त्वचा के ज़रिए प्याज़ के संक्रमण सोखने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। • बुख़ार या ज़ुकाम होने पर किसी वायरल दावों के बजाय डॉक्टरी सलाह ही कारगर होती है। सोशल मीडिया के दौर में बिना किसी वैज्ञानिक आधार के अजीबोगरीब घरेलू नुस्खे वायरल होना आम बात हो गई है। हाल ही में एक ऐसा ही दावा शेयर किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि पैर में कच्चा प्याज़ रखकर मोज़े पहनकर सोने से शरीर का ज़ुकाम और बुख़ार गायब हो जाता है। लोग बिना सच्चाई जाने इसे शेयर कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने इन दावों की पड़ताल करते हुए इन्हें पूरी तरह से काल्पनिक और वैज्ञानिक तथ्यों से परे बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज़ में कोई ऐसा अवशोषक गुण नहीं होता जो त्वचा के संपर्क में आकर शरीर के बैक्टीरिया या बीमारी पैदा करने वाले वायरस को बाहर खींच ले। चिकित्सकों की राय है कि इस तरह के भ्रामक दावों पर भरोसा करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को ज़ुकाम, खांसी या बुख़ार की शिकायत है, तो उसे इंटरनेट के अधूरे ज्ञान पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत योग्य डॉक्टर से मिलकर सही इलाज और दवाइयां लेनी चाहिए।
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Unrelated Video Shared As Showing Passengers, Crew Restraining Co-Pilot On Flydubai Flight🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

Unrelated Video Shared As Showing Passengers, Crew Restraining Co-Pilot On Flydubai Flight

❌ वायरल दावा:
Unrelated Video Shared As Showing Passengers, Crew Restraining Co-Pilot On Flydubai Flight
✅ पड़ताल का सच:
The viral video falsely claims to be from the Flydubai flight FZ1073. The video is actually from July 2025, showing an unrelated incident.
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Fact Check: राहुल गांधी के ख‍िलाफ फेक पोस्‍ट वायरल, दैनिक जागरण का नहीं है फ्रंट पेज🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: राहुल गांधी के ख‍िलाफ फेक पोस्‍ट वायरल, दैनिक जागरण का नहीं है फ्रंट पेज

❌ वायरल दावा:
राहुल गांधी के ख‍िलाफ फेक पोस्‍ट वायरल, दैनिक जागरण का नहीं है फ्रंट पेज
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। लोकसभा में व‍िपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लेकर सोशल मीड‍िया पर ‘दैन‍िक जागरण’ का एक कथित फ्रंट पेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें राहुल गांधी के ख‍िलाफ एक खबर छपी है। इस खबर में लिखा है क‍ि देश में The post Fact C
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PIB Fact Check: क्या केंद्र सरकार सभी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप और ₹50,000 की छात्रवृत्ति दे रही है?🔍 फ़ैक्ट चेकPIB Fact Check (भारत सरकार)

PIB Fact Check: क्या केंद्र सरकार सभी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप और ₹50,000 की छात्रवृत्ति दे रही है?

❌ वायरल दावा:
केंद्र सरकार की नई योजना के तहत सभी छात्रों को मुफ्त लैपटॉप और ₹50,000 मिलेंगे।
✅ पड़ताल का सच:
PIB Fact Check ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना नहीं चलाई जा रही है। यह लिंक फर्जी है और किसी भी अनजान लिंक पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।
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PIB Fact Check: रेलवे में 50,000 पदों पर सीधी भर्ती का वायरल नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी🔍 फ़ैक्ट चेकPIB Fact Check

PIB Fact Check: रेलवे में 50,000 पदों पर सीधी भर्ती का वायरल नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी

❌ वायरल दावा:
भारतीय रेलवे बिना परीक्षा के 50,000 पदों पर डायरेक्ट जॉइनिंग दे रहा है।
✅ पड़ताल का सच:
PIB Fact Check के अनुसार रेलवे केवल आधिकारिक वेबसाइट्स (rrbcdg.gov.in) के माध्यम से ही पारदर्शी परीक्षा द्वारा भर्तियां करता है। यह पत्र फ्रॉड है।
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Factly पड़ताल: क्या आधार कार्ड से ₹2 लाख का पर्सनल लोन बिना ब्याज के मिल रहा है?🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

Factly पड़ताल: क्या आधार कार्ड से ₹2 लाख का पर्सनल लोन बिना ब्याज के मिल रहा है?

❌ वायरल दावा:
आधार कार्ड पर सरकार दे रही है ₹2 लाख का शून्य ब्याज लोन।
✅ पड़ताल का सच:
Factly पड़ताल में पाया गया कि UIDAI केवल पहचान प्रमाण पत्र जारी करता है, कोई वित्तीय ऋण नहीं देता। यह वीडियो व्यूज बढ़ाने और साइबर फ्रॉड के लिए बनाए गए हैं।
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एआई मगरमच्छ की फर्जी तस्वीर शेयर करना पड़ा महंगा, सिंगापुर में शख्स गिरफ्तार🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

एआई मगरमच्छ की फर्जी तस्वीर शेयर करना पड़ा महंगा, सिंगापुर में शख्स गिरफ्तार

❌ वायरल दावा:
एआई मगरमच्छ की फर्जी तस्वीर शेयर करना पड़ा महंगा, सिंगापुर में शख्स गिरफ्तार
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: - सिंगापुर में एक जलाशय को लेकर एआई से बनाई गई मगरमच्छ की तस्वीर वायरल हुई। - पुलिस ने इस फर्जीवाड़े और दहशत फैलाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। - तकनीक के इस दौर में लोग बिना जांचे-परखे किसी भी फेक तस्वीर को सच मानकर शेयर कर रहे हैं। आज के इस डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का इस्तेमाल जितना रचनात्मक कार्यों के लिए हो रहा है, उससे कहीं ज्यादा इसका गलत इस्तेमाल डर और अफवाहें फैलाने के लिए किया जा रहा है। सिंगापुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर चमकती या डरावनी चीज सच नहीं होती। लोग लाइक्स और व्यूज के चक्कर में ऐसा कंटेंट शेयर कर देते हैं जो समाज में सनसनी पैदा कर देता है। प्रशासन और कानून एजेंसियों के लिए अब ऐसे डिजिटल प्रैंक और फेक न्यूज फैलाने वाले सिरदर्द बनते जा रहे हैं। जब तक लोग खुद जिम्मेदार नागरिक बनकर फॉरवर्ड करने से पहले सच की पड़ताल नहीं करेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। तकनीकी क्रांति के साथ इंसानी समझ का भी अपग्रेड होना बेहद जरूरी हो गया है, वरना हर फर्जी तस्वीर लोगों को ऐसे ही बेवकूफ बनाती रहेगी।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, ट्रेन के सामने साड़ी पहनकर महिला ने बनाई रील🔍 फ़ैक्ट चेकVerified Publisher

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, ट्रेन के सामने साड़ी पहनकर महिला ने बनाई रील

❌ वायरल दावा:
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, ट्रेन के सामने साड़ी पहनकर महिला ने बनाई रील
✅ पड़ताल का सच:
📌 मुख्य बातें: • सोशल मीडिया पर एक महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। • वीडियो में महिला रेलवे ट्रैक पर साड़ी पहनकर डांस करती दिख रही है। • महिला ने अपनी साड़ी का पल्लू ट्रेन के इंजन से बांधा हुआ है। सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज बटोरने के चक्कर में लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसकी बानगी इस वायरल वीडियो में साफ देखी जा सकती है। इंटरनेट पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें एक महिला ने रेलवे ट्रैक जैसी संवेदनशील और खतरनाक जगह को अपने रील शूटिंग का अड्डा बना लिया। हैरानी की बात यह है कि महिला ने न सिर्फ ट्रैक पर डांस किया, बल्कि अपनी साड़ी के पल्लू को ट्रेन के इंजन से बांधकर खतरनाक तरीके से वीडियो शूट कराया। इस तरह के वीडियो समाज में एक बहुत ही गलत संदेश देते हैं। रेलवे ट्रैक ट्रेन की आवाजाही के लिए बने हैं, न कि सोशल मीडिया पर स्टंटबाजी और रील्स बनाने के लिए। इस तरह की हरकतें न सिर्फ खुद की जान को खतरे में डालती हैं, बल्कि रेलवे सुरक्षा नियमों का भी खुला उल्लंघन हैं। ऐसे मामलों में रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई इस तरह की जानलेवा लापरवाही न दोहराए।
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Fact Check: अखिलेश यादव और सपा की तारीफ करते इमरान मसूद का वायरल बयान 2022 का है🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: अखिलेश यादव और सपा की तारीफ करते इमरान मसूद का वायरल बयान 2022 का है

❌ वायरल दावा:
अखिलेश यादव और सपा की तारीफ करते इमरान मसूद का वायरल बयान 2022 का है
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नेताओं की जुबानी जंग जारी है। इस दौरान सहारनपुर से सांसद एवं कांग्रेस नेता इमरान मसूद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा The post Fact Check: अखिलेश यादव
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Fact Check: भारतीय सेना प्रमुख के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए बनाया गया फर्जी AI वीडियो🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: भारतीय सेना प्रमुख के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए बनाया गया फर्जी AI वीडियो

❌ वायरल दावा:
भारतीय सेना प्रमुख के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए बनाया गया फर्जी AI वीडियो
✅ पड़ताल का सच:
नई द‍िल्‍ली (विश्वास न्‍यूज)। सोशल मीड‍िया पर एक वीड‍ियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें कथित तौर पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को एक मह‍िला के साथ नाचते हुए द‍िखाया गया है। वीड‍ियो के साथ दावा क‍िया गया है क‍ि भारतीय सेना प्रमु
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‘RAW-Mossad Conspiracy’? Fake BBC Report Accusing Indian Of Attempting To Hijack Flydubai Plane Viral As Real🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

‘RAW-Mossad Conspiracy’? Fake BBC Report Accusing Indian Of Attempting To Hijack Flydubai Plane Viral As Real

❌ वायरल दावा:
‘RAW-Mossad Conspiracy’? Fake BBC Report Accusing Indian Of Attempting To Hijack Flydubai Plane Viral As Real
✅ पड़ताल का सच:
The viral video has been created by altering an existing BBC News broadcast and adding AI-generated audio and captions.
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Does This Video Show Passengers Celebrating After Foiling Hijack Bid On Flydubai Flight?🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

Does This Video Show Passengers Celebrating After Foiling Hijack Bid On Flydubai Flight?

❌ वायरल दावा:
Does This Video Show Passengers Celebrating After Foiling Hijack Bid On Flydubai Flight?
✅ पड़ताल का सच:
The viral video dates back to at least August 2025 and is unrelated to the September 30, 2026 incident involving the Flydubai flight from Dubai to Tel Aviv.
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दिल्ली में 24 विधानसभा सीटों के ड्राफ़्ट लिस्ट में 2025 के मतदान से भी कम नाम हैं🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

दिल्ली में 24 विधानसभा सीटों के ड्राफ़्ट लिस्ट में 2025 के मतदान से भी कम नाम हैं

❌ वायरल दावा:
दिल्ली में 24 विधानसभा सीटों के ड्राफ़्ट लिस्ट में 2025 के मतदान से भी कम नाम हैं
✅ पड़ताल का सच:
दिल्ली की नई ड्राफ़्ट वोटर लिस्ट में 97,53,577 नाम हैं. फ़रवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में 94,94,607 लोगों ने वोट दिया था. अठारह महीने बाद, योग्य वोटरों की लिस्ट में पिछले साल वोट देने वाले लोगों की संख्या से सिर्फ़ 2,58,970 (यानी 2.7%) ज़्यादा नाम हैं. अब, दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से
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Fact Check: एक म‍िनट में इस्‍तीफा देने वाला केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का दो साल पुराना बयान अब वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: एक म‍िनट में इस्‍तीफा देने वाला केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का दो साल पुराना बयान अब वायरल

❌ वायरल दावा:
एक म‍िनट में इस्‍तीफा देने वाला केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का दो साल पुराना बयान अब वायरल
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। बिहार के जमुई में 19 सितंबर 2026 की देर शाम नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के बाद केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने ऐसी घटना पर शर्मिंदगी व्यक्त करते हुए ब‍िहार सरकार से कठोर कार्रवाई करने की मांग The pos
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Muslim Students Lynch Hindu Boy In Bangladesh Over ‘Blasphemy’? Here's The Truth Behind Viral Video🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

Muslim Students Lynch Hindu Boy In Bangladesh Over ‘Blasphemy’? Here's The Truth Behind Viral Video

❌ वायरल दावा:
Muslim Students Lynch Hindu Boy In Bangladesh Over ‘Blasphemy’? Here's The Truth Behind Viral Video
✅ पड़ताल का सच:
The video dates back to 2024 and shows a crowd vandalising an army vehicle outside a police station while demanding action against a youth identified as Partha Biswas.
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Fact Check: साधु को थप्पड़ मारते पुलिसकर्मी के वीडियो में सांप्रदायिक एंगल नहीं, वायरल दावा गलत🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: साधु को थप्पड़ मारते पुलिसकर्मी के वीडियो में सांप्रदायिक एंगल नहीं, वायरल दावा गलत

❌ वायरल दावा:
साधु को थप्पड़ मारते पुलिसकर्मी के वीडियो में सांप्रदायिक एंगल नहीं, वायरल दावा गलत
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। एक पुलिसकर्मी को साधु को थप्पड़ मारते और उनसे बदसलूकी करते हुए सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है। इसे शेयर करते हुए यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह तमिलनाडु के वेल्लोर में हुई घटना का वीडियो है। आरोप लगाया जा रहा है कि वेल्लोर The post Fact Check: साधु को थप्पड़ मारते पुलिसकर्मी
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Does This Video Show Army Chief Dhiraj Seth Dancing With A Major’s Wife?🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

Does This Video Show Army Chief Dhiraj Seth Dancing With A Major’s Wife?

❌ वायरल दावा:
Does This Video Show Army Chief Dhiraj Seth Dancing With A Major’s Wife?
✅ पड़ताल का सच:
The viral clip purportedly showing Indian Army chief General Dhiraj Seth dancing with a major’s wife at a party is fake
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"दुर्गा बन, तू काली बन, कभी न बुर्के वाली बन": काजल शिंगला ने स्कूली छात्राओं से नफरती नारे लगवाए

❌ वायरल दावा:
"दुर्गा बन, तू काली बन, कभी न बुर्के वाली बन": काजल शिंगला ने स्कूली छात्राओं से नफरती नारे लगवाए
✅ पड़ताल का सच:
छत्तीसगढ़ के रायपुर में श्री गुजराती इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में काजल शिंगला उर्फ काजल 'हिंदुस्तानी' ने स्कूली छात्राओं से "दुर्गा बन, तू काली बन, कभी न बुर्के वाली बन" और "धर्म की रक्षा कौन करेगा? "हम करेंगे, हम करेंगे" जैसे नारे लगवाए. इस आयोजन का एक वीडियो काजल
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Fact Check: सपा के वर‍िष्‍ठ नेता श‍िवपाल स‍िंह यादव का सात साल पुराना बयान अब झूठे दावे के साथ वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: सपा के वर‍िष्‍ठ नेता श‍िवपाल स‍िंह यादव का सात साल पुराना बयान अब झूठे दावे के साथ वायरल

❌ वायरल दावा:
सपा के वर‍िष्‍ठ नेता श‍िवपाल स‍िंह यादव का सात साल पुराना बयान अब झूठे दावे के साथ वायरल
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। उत्तर प्रदेश में व‍िधानसभा चुनाव 2027 में होगा। जैसे-जैसे चुनाव की घड़ियां करीब आ रही हैं, नेताओं की बयानबाजी भी तेज हो रही है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने समाजवादी पार्टी (सपा) के मुख‍िया अख&
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Fact Check: जयपुर में पुजारी की पिटाई के वीडियो को छेड़खानी के झूठे दावे के साथ क‍िया गया वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: जयपुर में पुजारी की पिटाई के वीडियो को छेड़खानी के झूठे दावे के साथ क‍िया गया वायरल

❌ वायरल दावा:
जयपुर में पुजारी की पिटाई के वीडियो को छेड़खानी के झूठे दावे के साथ क‍िया गया वायरल
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 17 सेकंड का एक वीड‍ियो खूब वायरल हो रहा है। इसमें एक युवक और एक मह‍िला को मंद‍िर में मौजूद बुजुर्ग पुजारी को बेरहमी से पीटते हुए देखा जा सकता है। वीड‍ियो को शेयर करते हुए दावा क‍िया जा रहा The post Fac
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Fact Check: LPU केस में आरोपी और अमित शाह के कनेक्शन का दावा करता एसपी का वीडियो डीपफेक है🔍 फ़ैक्ट चेकVishvas News

Fact Check: LPU केस में आरोपी और अमित शाह के कनेक्शन का दावा करता एसपी का वीडियो डीपफेक है

❌ वायरल दावा:
LPU केस में आरोपी और अमित शाह के कनेक्शन का दावा करता एसपी का वीडियो डीपफेक है
✅ पड़ताल का सच:
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। पंजाब की फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में 26 सितंबर 2026 की रात छात्रों ने जमकर हंगामा किया। यूनिवर्सिटी की एक छात्रा से कथित रेप का दावा सोशल मीडिया ग्रुप्स में तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए और उन्होंने The post Fact Check:
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Does This Viral Video Show Man Thrashing Hindu Priest For Molesting Daughter?🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

Does This Viral Video Show Man Thrashing Hindu Priest For Molesting Daughter?

❌ वायरल दावा:
Does This Viral Video Show Man Thrashing Hindu Priest For Molesting Daughter?
✅ पड़ताल का सच:
The viral footage is from an incident at a Shiva temple in Jaipur where a dispute over the volume of music during a puja escalated into a physical altercation involving priest Ramkrishna.
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LPU Alleged Rape Case: Viral Video Of Punjab Police Officer Saying Amit Shah’s Nephew Involved Is Doctored🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

LPU Alleged Rape Case: Viral Video Of Punjab Police Officer Saying Amit Shah’s Nephew Involved Is Doctored

❌ वायरल दावा:
LPU Alleged Rape Case: Viral Video Of Punjab Police Officer Saying Amit Shah’s Nephew Involved Is Doctored
✅ पड़ताल का सच:
The viral video claiming to show a Punjab police officer saying that a BJP worker and Amit Shah’s nephew was involved in the LPU alleged rape case is manipulated.
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जमुई: पीड़िता ने वीडियो बनाकर मदद नहीं मांगी, वायरल वीडियो किसी और का निकला🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

जमुई: पीड़िता ने वीडियो बनाकर मदद नहीं मांगी, वायरल वीडियो किसी और का निकला

❌ वायरल दावा:
जमुई: पीड़िता ने वीडियो बनाकर मदद नहीं मांगी, वायरल वीडियो किसी और का निकला
✅ पड़ताल का सच:
हाल ही में बिहार के जमुई से एक घटना सामने आई थी जिसमें दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक लड़के और लड़की के साथ कुछ लोगों ने बदसलूकी और छेड़खानी की थी. इसी घटना से जोड़कर एक रोती हुई लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. इसे शेयर करते हुए दावा किया जा रहा
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‘Will Kick Them Out’: Does Viral Video Show Assam CM Threatening CJP Protesters?🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

‘Will Kick Them Out’: Does Viral Video Show Assam CM Threatening CJP Protesters?

❌ वायरल दावा:
‘Will Kick Them Out’: Does Viral Video Show Assam CM Threatening CJP Protesters?
✅ पड़ताल का सच:
The viral video of Himanta Biswa Sarma, in which he is heard saying "will kick them out" has no connection to the recent CJP protest. The video is five months old.
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Scripted Video Shared As Showing Elderly Disabled Muslim Man Being Harassed In India🔍 फ़ैक्ट चेकNewschecker

Scripted Video Shared As Showing Elderly Disabled Muslim Man Being Harassed In India

❌ वायरल दावा:
Scripted Video Shared As Showing Elderly Disabled Muslim Man Being Harassed In India
✅ पड़ताल का सच:
The viral video is scripted and does not show a real incident of an elderly disabled Muslim man being harassed in India.
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Zee News पर AMU विरोध प्रदर्शन की 'भड़काऊ' कवरेज के लिए ₹2 लाख का जुर्माना लगाया गया

❌ वायरल दावा:
Zee News पर AMU विरोध प्रदर्शन की 'भड़काऊ' कवरेज के लिए ₹2 लाख का जुर्माना लगाया गया
✅ पड़ताल का सच:
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने पिछले साल अगस्त में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रों के विरोध प्रदर्शन की कवरेज के लिए ज़ी न्यूज़ पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. शिकायत दर्ज होने के एक साल से ज़्यादा समय बाद, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस ए.के. सिकर
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जमुई पुलिस ने वायरल दावे को झुठलाया- एनकाउंटर में घायल आरोपी वो नहीं जिसे दूसरे दिन चलते हुए देखा गया🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

जमुई पुलिस ने वायरल दावे को झुठलाया- एनकाउंटर में घायल आरोपी वो नहीं जिसे दूसरे दिन चलते हुए देखा गया

❌ वायरल दावा:
जमुई पुलिस ने वायरल दावे को झुठलाया- एनकाउंटर में घायल आरोपी वो नहीं जिसे दूसरे दिन चलते हुए देखा गया
✅ पड़ताल का सच:
बिहार के जमुई जिले में 19 सितंबर को दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक लड़के और लड़की के साथ मारवा पहाड़ के पास कोचिंग से लौटते समय कुछ लोगों ने बदसलूकी और छेड़छाड़ की थी. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें आरोपियों को लड़की के साथ अभद्रता करते हुए देखा
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आलोक भट्ट: विवादित पोस्ट, X हैंडल पर रोक और 'द पैम्फलेट' का अनदेखा कनेक्शन🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

आलोक भट्ट: विवादित पोस्ट, X हैंडल पर रोक और 'द पैम्फलेट' का अनदेखा कनेक्शन

❌ वायरल दावा:
आलोक भट्ट: विवादित पोस्ट, X हैंडल पर रोक और 'द पैम्फलेट' का अनदेखा कनेक्शन
✅ पड़ताल का सच:
17 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई सोशल मीडिया टीम का ऐलान किया. इसमें दीपक म्हास्के को नेशनल सोशल मीडिया कन्वीनर और प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को को-कन्वीनर बनाया गया. जब लोगों में ये जानने की उत्सुकता बढ़ी कि ये नए लोग कौन हैं और पार्टी के
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गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले के आरोपी के समर्थन में गुर्जर समुदाय की रैली बताकर पुराना वीडियो वायरल🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले के आरोपी के समर्थन में गुर्जर समुदाय की रैली बताकर पुराना वीडियो वायरल

❌ वायरल दावा:
गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले के आरोपी के समर्थन में गुर्जर समुदाय की रैली बताकर पुराना वीडियो वायरल
✅ पड़ताल का सच:
सोशल मीडिया यूजर्स और कुछ मीडिया आउटलेट्स ने एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले के आरोपी कल्याण बैंसला के समर्थन में गुर्जर समुदाय के लोगों ने रैली निकाली. वीडियो में कई कारों के साथ रैली में गाड़ियों के दरवाजों व बोनट पर खड़े दिखाई दे रहे हैं. दरअसल, 13 सितंबर
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सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुतियों के हमले बताकर 2022 का वीडियो शेयर🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुतियों के हमले बताकर 2022 का वीडियो शेयर

❌ वायरल दावा:
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुतियों के हमले बताकर 2022 का वीडियो शेयर
✅ पड़ताल का सच:
सोशल मीडिया पर भीषण आग का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. कई दक्षिणपंथी अकाउंट ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच हालिया तनाव का बताकर दावा किया कि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल भंडारों पर हमला किया है, जिसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी शामिल है. साथ ही, इस वीडियो के
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धमकी देते स्वतंत्र भारद्वाज का वायरल वीडियो 17 सितंबर को अंतरिम जमानत मिलने से पहले का है🔍 फ़ैक्ट चेकAlt News Hindi

धमकी देते स्वतंत्र भारद्वाज का वायरल वीडियो 17 सितंबर को अंतरिम जमानत मिलने से पहले का है

❌ वायरल दावा:
धमकी देते स्वतंत्र भारद्वाज का वायरल वीडियो 17 सितंबर को अंतरिम जमानत मिलने से पहले का है
✅ पड़ताल का सच:
हिंदुत्ववादी कट्टरपंथी स्वतंत्र भारद्वाज को तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत मिलने की खबर के तुरंत बाद, 1 मिनट 16 सेकंड का एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में एक और शख्स है, जो भारद्वाज की रिहाई की बात करते हुए उसकी तुलना शिकार पर निकले शेर से करता है. इसके बाद भारद्वाज उन लोगों को
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Viral video misquotes doctor guidelines to claim high blood sugar levels are no longer considered diabetes🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

Viral video misquotes doctor guidelines to claim high blood sugar levels are no longer considered diabetes

❌ वायरल दावा:
Viral video misquotes doctor guidelines to claim high blood sugar levels are no longer considered diabetes
✅ पड़ताल का सच:
A video (here & here) circulating widely on social media claims that, according to 2018 guidelines from the American College of Physicians (ACP), an HbA1c level of 8.4% does not mean a person has diabetes. The video also asserts that a post-prandial (after-meal) blood glucose level of up to 250 mg/d
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India's passport ranking has not declined from 76th in 2014 to 125th in 2026; the viral post is misleading🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

India's passport ranking has not declined from 76th in 2014 to 125th in 2026; the viral post is misleading

❌ वायरल दावा:
India's passport ranking has not declined from 76th in 2014 to 125th in 2026; the viral post is misleading
✅ पड़ताल का सच:
A post claiming that India's passport ranking declined from 76th in 2014 to 125th in 2026 after Narendra Modi became Prime Minister of India is being widely circulated on social media platforms (here, here, and here). Through this article, let us fact-check the claim made in the post. Claim: India's
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No, Gold Worth ₹1.28 lakh crore has not gone missing from India’s treasury🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

No, Gold Worth ₹1.28 lakh crore has not gone missing from India’s treasury

❌ वायरल दावा:
No, Gold Worth ₹1.28 lakh crore has not gone missing from India’s treasury
✅ पड़ताल का सच:
A post featuring an article published by Punjab Kesari with the headline: “RBI Gold Reserve Data: Gold worth ₹1.28 lakh crore missing from the country’s treasury! RBI data causes panic” is being shared on social media (here, here, here). Let’s verify the accuracy of this claim made in the post. Clai
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భారత సుప్రీంకోర్టు పెన్షన్ కమ్యుటేషన్ రికవరీ వ్యవధిని తగ్గించలేదు🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

భారత సుప్రీంకోర్టు పెన్షన్ కమ్యుటేషన్ రికవరీ వ్యవధిని తగ్గించలేదు

❌ वायरल दावा:
భారత సుప్రీంకోర్టు పెన్షన్ కమ్యుటేషన్ రికవరీ వ్యవధిని తగ్గించలేదు
✅ पड़ताल का सच:
15 డిసెంబర్ 2025 నాటి ఒక అధికారిక గెజిట్ నోటిఫికేషన్ యొక్క గ్రాఫిక్‌ను కలిగి ఉన్న పోస్ట్‌ను (ఇక్కడ, ఇక్కడ) షేర్ చేస్తూ, సుప్రీం కోర్టు, సివిల్ రిట్ పిటిషన్ నంబర్ 2490, కేసు నంబర్ 8222/2024లో, కేంద్ర ప్రభుత్వ ఉద్యోగుల పెన్షన్ కమ్యుటేషన్ రికవరీ వ్యవధి ఇప్పుడు 15 సంవత్సరాలకు బదులుగా 10 సంవత్సరాల 8 నెలల
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The Supreme Court of India did not reduce the pension commutation recovery period🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

The Supreme Court of India did not reduce the pension commutation recovery period

❌ वायरल दावा:
The Supreme Court of India did not reduce the pension commutation recovery period
✅ पड़ताल का सच:
A post featuring a graphic of an official Gazzate notification dated 15 December 2025 is being shared (here, here, here) with the claim that “the Supreme Court, in a significant decision in Civil Writ Petition No. 2490 and Case No. 8222/2024, has directed that the recovery period for pension commuta
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భారత ప్రభుత్వం “2025 సీనియర్ స్కీం అప్డేట్” అనే పేరుతో ఎటువంటి సమగ్ర పథకాన్ని ఆమోదించలేదు🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

భారత ప్రభుత్వం “2025 సీనియర్ స్కీం అప్డేట్” అనే పేరుతో ఎటువంటి సమగ్ర పథకాన్ని ఆమోదించలేదు

❌ वायरल दावा:
భారత ప్రభుత్వం “2025 సీనియర్ స్కీం అప్డేట్” అనే పేరుతో ఎటువంటి సమగ్ర పథకాన్ని ఆమోదించలేదు
✅ पड़ताल का सच:
“భారత ప్రభుత్వం 21 నవంబర్ 2025న ప్రకటించిన '2025 సీనియర్ స్కీం అప్డేట్' వృద్ధులకు మరింత ఆర్థిక భద్రత, ఆరోగ్య సౌకర్యాలు, డిజిటల్ లిటరసీ, ప్రయాణ సబ్‌సిడీలు, నివాస భద్రత, హెల్ప్‌లైన్ సేవలు అందించడానికి రూపొందించిన సమగ్ర పథకం” అంటూ పలు ఉప స్కీములను ప్రస్తావిస్తూ సోషల్ మీడియాలో (ఇక్కడ, ఇక్కడ, ఇక్కడ) షేర్
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The National Lok Adalat scheduled for 13 December 2025 is not offering nationwide discounts on pending traffic challans🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

The National Lok Adalat scheduled for 13 December 2025 is not offering nationwide discounts on pending traffic challans

❌ वायरल दावा:
The National Lok Adalat scheduled for 13 December 2025 is not offering nationwide discounts on pending traffic challans
✅ पड़ताल का सच:
Several posts (here, here) on social media are going viral, claiming that a nationwide National Lok Adalat on 13 December 2025 will offer motorists a major opportunity to settle pending traffic challans with waivers ranging from 50% to 100%, depending on the state. The states said to be included are
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డిసెంబర్ 2025లో జరగనున్న లోక్ అదాలత్‌లలో పెండింగ్‌లో ఉన్న ట్రాఫిక్ చలాన్ల చెల్లింపుకు తెలంగాణ పోలీసులు ఎటువంటి రాయితీలు అందించడం లేదు🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

డిసెంబర్ 2025లో జరగనున్న లోక్ అదాలత్‌లలో పెండింగ్‌లో ఉన్న ట్రాఫిక్ చలాన్ల చెల్లింపుకు తెలంగాణ పోలీసులు ఎటువంటి రాయితీలు అందించడం లేదు

❌ वायरल दावा:
డిసెంబర్ 2025లో జరగనున్న లోక్ అదాలత్‌లలో పెండింగ్‌లో ఉన్న ట్రాఫిక్ చలాన్ల చెల్లింపుకు తెలంగాణ పోలీసులు ఎటువంటి రాయితీలు అందించడం లేదు
✅ पड़ताल का सच:
“పెండింగ్ ట్రాఫిక్ చలాన్లు ఉన్నవారికి సదావకాశం. డిసెంబర్ 13న జరిగే జాతీయ లోక్ అదాలత్‌లో పెండింగ్ చలాన్లు, పెనాల్టీలను సెటిల్ చేసుకోవడానికి అవకాశం కల్పించారు. అంతేకాకుండా 50 నుంచి 100 శాతం డిస్కౌంట్లు అందిస్తున్నారు. సీటు బెల్ట్ లేకపోవడం, సిగ్నల్ జంపింగ్ వంటి కేసులను లోక్ అదాలత్‌ సెటిల్ చేసుకోవచ్చు.
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2004లో మన్మోహన్ సింగ్ నేతృత్వంలోని UPA ప్రభుత్వం POTA చట్టాన్ని రద్దు చేసి, దాని స్థానంలో UAPA చట్టంలో మార్పులు చేసింది🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

2004లో మన్మోహన్ సింగ్ నేతృత్వంలోని UPA ప్రభుత్వం POTA చట్టాన్ని రద్దు చేసి, దాని స్థానంలో UAPA చట్టంలో మార్పులు చేసింది

❌ वायरल दावा:
2004లో మన్మోహన్ సింగ్ నేతృత్వంలోని UPA ప్రభుత్వం POTA చట్టాన్ని రద్దు చేసి, దాని స్థానంలో UAPA చట్టంలో మార్పులు చేసింది
✅ पड़ताल का सच:
“2002లో వాజ్‌పేయి ప్రభుత్వం ఉగ్రవాదాన్ని నిరోధించటానికి పోటా చట్టాన్ని తీసుకువచ్చింది. మన్మోహన్ అధికారంలోకి వచ్చిన వెంటనే కాంగ్రెస్ ప్రభుత్వం ఉగ్రవాదులను కాపాడటానికి పోటా చట్టాన్ని రద్దు చేసిందని ఎంతమందికి తెలుసు??” అని చెప్తూ ఉన్న పోస్ట్ ఒకటి సోషల్ మీడియాలో వైరల్ అవుతోంది (ఇక్కడ, ఇక్కడ, ఇక్కడ, ఇక్క
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The Prime Minister of India does not have any immunity from prosecution while in office🔍 फ़ैक्ट चेकFactly Verified

The Prime Minister of India does not have any immunity from prosecution while in office

❌ वायरल दावा:
The Prime Minister of India does not have any immunity from prosecution while in office
✅ पड़ताल का सच:
A video is going viral on social media claiming that the Prime Minister of India has special immunity from civil or criminal proceedings while in office. The video further alleges that this immunity against prosecution by any court was introduced during Indira Gandhi’s tenure as PM in 1975. Through
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