‘Bandar’ Movie Review: सिस्टम में फंसी कहानी, लेकिन क्या हर जवाब आसान हो जाता है?

अनुराग कश्यप की नई फिल्म ‘Bandar’ (बॉबी देओल, सान्या मल्होत्रा, सैपना पब्बी) एक ऐसे किरदार की कहानी दिखाती है जो शोहरत से गिरकर सिस्टम के सबसे अंधेरे हिस्से में पहुंच जाता है। फिल्म एक गंभीर विषय उठाती है—आरोप, न्याय व्यवस्था और समाज की सोच—लेकिन क्या यह इन सवालों को गहराई से खोल पाती है?

Bandar’ Movie Review

कहानी क्या है?

फिल्म का मुख्य किरदार समर मेहरा (बॉबी देओल) एक समय का मशहूर अभिनेता और सिंगर है, जिसकी जिंदगी अब धीरे-धीरे खत्म होती दिखती है। वह अकेला है, आर्थिक दबाव में है और मानसिक रूप से भी टूट चुका है।

सब कुछ बदल जाता है जब उस पर रेप के आरोप लगते हैं और उसे पुलिस हिरासत में ले जाया जाता है। यहीं से फिल्म का असली सफर शुरू होता है—कानूनी प्रक्रिया, पूछताछ और जेल का कठोर माहौल।

जेल और सिस्टम की सबसे कड़वी तस्वीर

फिल्म का सबसे मजबूत हिस्सा जेल के दृश्य हैं। नए कैदियों को जिस तरह अपमान और हिंसा का सामना करना पड़ता है, वह दर्शकों को असहज कर देता है। सिस्टम के भीतर इंसान कैसे “इंसान” नहीं रह जाता, यह फिल्म बार-बार दिखाने की कोशिश करती है।

यहां कुछ किरदार यह भी बताते हैं कि समाज में “अपराध” के प्रति खुद कैदियों का नजरिया भी कितना जटिल और विरोधाभासी हो सकता है।

अभिनय कैसा है?

बॉबी देओल ने समर के किरदार में एक मजबूत और भावनात्मक परफॉर्मेंस दी है। एक गिरते हुए स्टार की टूटन और डर को वह प्रभावी तरीके से दिखाते हैं।

सैपना पब्बी का किरदार रहस्यमय है, लेकिन फिल्म उसे पूरी तरह विकसित नहीं कर पाती। सान्या मल्होत्रा और अन्य सहायक कलाकार अपनी भूमिका में ठीक-ठाक नजर आते हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी

फिल्म की ताकत है—उसका माहौल, जेल का चित्रण और सिस्टम की क्रूरता दिखाने का तरीका। लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि कहानी कई जगह एक ही पक्ष पर ज्यादा झुकती दिखती है।

फिल्म कुछ बड़े सवाल उठाती है:

  • क्या आरोप और सच्चाई के बीच संतुलन हमेशा साफ होता है?
  • क्या सिस्टम हर किसी के साथ समान व्यवहार करता है?
  • क्या मीडिया और समाज पहले से राय बना लेते हैं?

लेकिन इन सवालों के जवाब कई बार बहुत सरल तरीके से दे दिए जाते हैं।

विश्लेषण

‘Bandar’ एक ऐसी फिल्म है जो आपको सोचने पर मजबूर करती है, लेकिन हर सोच को पूरी गहराई तक नहीं ले जाती। शुरुआती हिस्सा बेहद मजबूत है, लेकिन बीच और अंत में कहानी बार-बार एक ही दिशा में घूमती महसूस होती है।

अनुराग कश्यप अक्सर ग्रे शेड्स में कहानियां दिखाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यहां फिल्म कई जगह एक स्पष्ट झुकाव के साथ चलती है, जिससे इसकी बहस थोड़ी सीमित हो जाती है।

निष्कर्ष

‘Bandar’ एक असहज करने वाली लेकिन महत्वपूर्ण फिल्म है। यह सिस्टम, इंसान और समाज के बीच की जटिलता को छूती है, लेकिन पूरी तरह खोल नहीं पाती। फिल्म खत्म होने के बाद भी कुछ सवाल आपके साथ रह जाते हैं—और शायद यही इसकी असली ताकत भी है।


FAQ

1. ‘Bandar’ फिल्म किस बारे में है?
यह एक अभिनेता की कहानी है जिस पर गंभीर आरोप लगते हैं और वह न्याय व्यवस्था के कठोर सिस्टम में फंस जाता है।

2. क्या फिल्म सिर्फ एक पक्ष दिखाती है?
कई जगह ऐसा महसूस होता है कि कहानी मुख्य रूप से एक किरदार के नजरिए से आगे बढ़ती है।

3. फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा क्या है?
जेल के दृश्य और सिस्टम के अंदर की क्रूरता का चित्रण।

4. बॉबी देओल का प्रदर्शन कैसा है?
उनका अभिनय फिल्म का सबसे मजबूत पहलू है।

5. क्या फिल्म देखने लायक है?
अगर आप गंभीर और सिस्टम-आधारित ड्रामा पसंद करते हैं तो यह फिल्म देखी जा सकती है।

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Kumari
Written by Kumari
इन्हें बिज़नेस, टेक्नोलॉजी, मूवीज़ और रिलेशनशिप्स जैसे विषयों पर लिखना बहुत पसंद है। इन्होंने B.Tech और MBA किया है।

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