Romantic stories of romantic love Motivational in Hindi

Romantic stories of romantic love – जादू की गोली  Motivational

राजेश बहुत आलसी था। हर काम वह देर से करता था। देर से उठता था, देर से खाना खाता था और स्कूल भी देर से पहुंचता था। सभी उसके आलसी स्वभाव से तंग थे। एक दिन उसके पापा ने कहा, “राजेश, तुम हर काम में सुस्त हो। आलसी व्यक्ति संसार में कभी सफल नहीं हो सकता। यदि तुम एक सप्ताह तक हर काम ठीक समय पर करोगे, तो मैं तुम्हें नई साइकल ले दूंगा।”


राजेश ने खुशी से उछलते हुए कहा, “सच!” उसके सभी दोस्तों के पास साइकलें थीं। राजेश ने पापा को कई बार साइकल ले देने के लिए कहा था, पर उसके पापा का एक ही उत्तर होता था, “तुम आलसी हो।हम तुम्हारी बात नहीं सुनेंगे। आज उन्होंने स्वयं साइकल खरीदकर देने की बात कही थी। राजेश ने पापा से कहा, “मैं हर काम समय पर किया करूंगा।”


राजेश ने यह कह तो दिया, पर उसे विश्वास नहीं था कि वह सुबह जल्दी उठ सकेगा।वह सोचने लगा, यदि कोई जादू मिल जाए, तो बात बने। उसे याद आया कि वन में एक बुढ़िया रहती है। वह कुछ जादू-टोना भी जानती है। शायद वह कोई जादू दे दे। वह वन की ओर दौड़ा। वन में बुढ़िया से उसने अपने मन की बात कही।

बुढ़िया ने उसे एक हरी सी गोली दी। उसने कहा, “यह तुम्हारे आलस के लिए बहुत बढ़िया जादू है।इससे तुम्हारी बांहें और टांगें मजबूत हो जाएंगी। उनमें स्फूर्ति आ जाएगी। पर जब तुम्हें साइकल मिल जाए, तो सप्ताह में दो बार मेरा संदेश शहर ले जाया करना” “जरूर!” राजेश ने कहा। वह भागा हुआ घर आया।

“Romantic stories of romantic love Motivational in Hindi”

रात को सोने से पहले उसने जादू की गोली खा ली।रात भर जादू उसके शरीर पर असर करता रहा। जादू उसकी बांहों,टांगों, उंगलियों औरटखनों


में प्रवेश कर गया। जादू ने उसे सुबह बहुत जल्दी उठा दिया। उस समय घर में कोई जागा नहीं था। राजेश ने जम्हाईली। पांव फैलाए।पर उसकी टांगों में न जाने कैसी शक्ति आ गई।वह एकदम बिस्तरसे उसे बाहर खींच ले आई।


राजेश हैरान रह गया। अब उसके हाथ भी बड़ी तेजी से काम करने लगे। उन्होंने उसे पतलून पहनाई। कमीज पहनाई। अब टांगों ने अपनी ड्यूटी संभाली। वे उसे नाश्ते की मेज पर घसीट कर ले गई। अब उसके हाथ उसे नाश्ता कराने लगे।उसके हाथ तेजी से बिस्कुट और दूध उसके मुंह में ढूंस रहे थे। उसका गला घुटने लगा। फिर उसके हाथ तेजी से हलवा उसके मुंह में डालने लगे। राजेश की मम्मी ने कहा, “राजेश बेटा, ऐसी क्या जल्दी है ?

कल तक तुम इतने आलसी थे कि खाने में घंटों लगाते थे। थोड़ा धीरे खाओ।” पर राजेश उनकी बात न मान सका। तब तक हाथ-मुंह धोकर पापा भी आ गए थे। वह राजेश के इस अनोखे व्यवहार पर हैरान हुए और बोले, “राजेश, तुम्हारी यह जल्दबाजी ठीक नहीं। इस तरह से तुम्हें साइकल नहीं मिल जाएगी! ” पर राजेश शांति से न बैठ सका।उस पर जादू की गोली असर कर रही थी। वह स्कूल के लिए फटाफट तैयार हुआ और मम्मी-पापा को ‘टा-टा’ कर घर से बाहर हो गया।


राजेश तेजी से दौड़ते हुए स्कूल पहुंचा।पर पूरा स्कूल सुनसान था। वह आधा घंटा पहले ही स्कूल पहुंच गया था। उसके हाथ और पैर सुस्त नहीं रह सकते थे। वह स्कूल के बाग में गया। वहां उसके हाथों ने बाग में उगी फालतू घास काटनी शुरू कर दी। इतने में प्रिंसिपल आ पहुंचे। उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। स्कूल का सबसे सुस्त लड़का राजेश फुरती से बाग साफ कर रहा था। वह बहुत खुश हुए। राजेश बहुत थक गया था। इतनी मेहनत करने की उसे आदत नहीं थी। वह अपनी सीट पर बैठ गया।


उसने सोचा, ‘अब कुछ आराम मिलेगा।’ पर उसे आराम न मिल सका। उसके हाथ तेजी से कॉपी पर प्रश्न लिखने लगे। जादू की गोली का दिमाग पर भी प्रभाव हो गया था। राजेश झटपट प्रश्न हल करने लगा। उस समय वह उत्तरों के सिवा कुछ नहीं सोच पा रहा था। उसके गणित के टीचर हैरान थे। उन्होंने कहा, “राजेश, आज मैं तुमसे बहुत खुश हूं।” तभी हाफटाइम की घंटी बजी। राजेश खेल के मैदान की ओर दौड़ा।दो-तीन लड़कों को गिराता हुआ, वह मैदान में पहुंचा। इस पर लड़कों ने चिल्लाते हुए कहा, “इतनी क्या जल्दी है,राजेश!

इस तरह दौड़ना बंद करो, किसी को चोट लग जाएगी।” पर उसने किसी की बात न सुनी। खेल के मैदान में राजेश की टांगें बिजली की गति से दौड़ रही थीं। उसने धड़ाधड़ तीन-चार गोल कर दिए। लड़के राजेश की फुरती पर तालियां पीटने लगे। राजेश पूरे मैदाम में गेंद के साथ-साथ दौड़ता नजर आ रहा था। इसी में उसकी एक लड़के से टक्कर हो गई।लड़के का नाम मोहन था। वह राजेश का बहुत अच्छा मित्र था। वह राजेश की टक्कर लगने से क्रोध से लाल-पीला हो गया। उसने राजेश को एक थप्पड़ दे मारा। फिर राजेश के मुक्के मोहन पर बरसने लगे।


“लड़ाई हो गई! लड़ाई …!” लड़के चिल्लाए। दोनों के चारों ओर लड़के इकट्ठे हो गए। राजेश लड़ना नहीं चाहता था, पर उसके मुक्के पर तो जादू की गोली का प्रभाव था।वे मोहनपर बरसते गए। मोहन की नाक से खून बहने लगा। उसी समय स्पोर्ट्स टीचर आ गए। उन्होंने दोनों को छुड़ाया और राजेश को कक्षा में भेज दिया। छुट्टी की घंटी बजी। राजेश बिना एक क्षण रुके घर भागा।


घर पहुंचकर उसने मम्मी से खाना मांगा। मम्मी ने खाना परोसा ही था कि वह फटाफट खाने लगा।यह देखकर उसकी मम्मी चौंक पड़ी। उन्होंने कहा, “राजेश, तुम्हें क्या हो गया है! लगता है, जैसे किसी ने तुम पर जादू कर दिया है। राजेश ने रोंआसे स्वर में कहा, “मम्मी, मैं क्या करू पापा
ने नई साइकल लेकर देने के लिए कहा था। मैं आलस दूर करने के लिए वन की बुढ़िया के पास गया। उसने मुझे जादू की एक गोली
दी। उस गोली ने मुझे इतना तेज और स्फूर्ति वाला बना दिया है।


मम्मी, इस तेजी से तो मैं तंग आ गया हूं। अब मैं क्या करूं?” मम्मी राजेश को बुढ़िया के पास ले गई।बुढ़िया जादूका प्रभाव सुनकर खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसने कहा, “मैं यह जादू वापस नहीं ले सकती “अब मैं आलसी नहीं रहूंगा। मुझे इस जादू की जरूरत नहीं है। आप इसे अवश्य वापस ले लें।” राजेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। बुढ़िया नहीं मानी। बुढ़िया ने कहा, “यह जादू एक-दो दिन तुम्हारे शरीर में रहेगा।तुम हर काम अपने आप तेजी से और समय पर करते रहे, तो यह जादू अपने आप खत्म हो जाएगा। अगर तुम फिर सुस्त हो गए, तो यह जादू फिर आ जाएगा।”


राजेश ने बुढ़िया को वचन दिया, “मैं कभी आलस नहीं करूंगा। फिर वह अपनी मां के साथ घर लौट आया। राजेश के शरीर में वह जादूदो दिन रहा।वह अब सुबह अपने आप जल्दी उठता।हर काम समय पर करता। अब वह आलसी नहीं रहा। धीरे-धीरे गोली का जादू भी खत्म हो गया।
राजेश के इस परिवर्तन से प्रसन्न होकर उसके पापा ने उसे नई साइकल ले दी। अब राजेश खुशी-खुशी नई साइकल पर स्कूल जाने लगा।

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